भोपाल

निकाह कर मियां-बीवी खुश, लेकिन… रिश्तों की डोर बांधने वाले काजियों का टूट रहा दिल, ये है वजह

MP News: राजधानी भोपाल में 60 काजी, हर महीने होते हैं 500 से ज्यादा निकाह, रियासतकालीन परम्परा ने किया परेशान, जानें क्या है मामला? पत्रिका संवाददाता शकील खान की रिपोर्ट...
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Nov 10, 2025
MP news
MP news: फोटो: सोशल मीडिया)

MP News: निकाह कर मियां-बीवी तो खुश हैं, लेकिन निकाह कराने वाले काजी को कम फीस मिलने का गम सता रहा है। हम बात कर रहे हैं, राजधानी में दो परिवार को रिश्तों की डोर में बांधने वाले काजी के दुखड़े की। उनके लिए महज 375 रुपए नजराना राशि तय है। अब मसाजिद कमेटी ने नया फरमान जारी किया है। इसके तहत नजराना की रकम के लिए बैंक खाता खुलवाना होगा। मसाजिद कमेटी के सचिव मो. उबेस का कहना है कि वर-वधू पक्ष को काजी मसाजिद कमेटी से मुकर्रर होता है। एक निकाह पर 375 रुपए नजराना देते हैं। यह रियासत के दौर की व्यवस्था है। यह सिर्फभोपाल में है।

हर महीने 500 से ज्यादा निकाह

शहर में 60 से ज्यादा काजी हैं। हर माह 500 से ज्यादा निकाह में शामिल होते हैं। राजधानी में 8 लाख आबादी मुस्लिम है। मसाजिद कमेटी में 20 से 25 परिवार निकाह के लिए पंजीयन कराने हैं। रियासतकालीन परंपरा के तहत प्रक्रिया चल रही है। बता दें, अभी निकाह हल्का काजी को 375 और नायब को १२५ रुपए मिलते हैं। इसे क्रमश: बढ़ाकर 700, 300 करने की मांग चल रही है।

शहर में 60 काजी, बोले- आने-जाने में ही हो जाता है इतना खर्च

निकाहख्वां शब्बीर ने बताया, जो नजराना मिलता है वह आने जाने में ही खर्च हो जाता है। ऐसे में कई ने यह काम बंद कर दिया। परिवार रजिस्ट्रेशन फीस जमा करते हैं। उनकी ओर से राशि मिलती है या नहीं, तय नहीं होता।

जिलों में कमेटियां देखती हैं ये काम

एमपीके बाकी जिलों में कमेटियां यह काम देखती हैं। नजराने की रकम वर-वधू पक्ष मिलकर तय करता है। काजी की रजामंदी होती है। जमीयत उलेमा के इमरान हारून का कहना है कि नजराने की रकम बढ़ाई जाए।

Updated on:
10 Nov 2025 08:50 am
Published on:
10 Nov 2025 08:50 am