MP News: कानों में फैल रहा सर्दी-जुकाम का संक्रमण: छोटे बच्चों में बढ़ रहे एओएम के मामले, डॉक्टर्स ने बताया क्या है ओटाइटिस, कैसे फैल रहा ये संक्रमण, बच्चों और बड़ों में क्या हैं इसके लक्षण
MP News: ठंड के उतार-चढ़ाव के बीच बच्चों में सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और गले में खराश के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लगातार सर्दी-जुकाम के चलते संक्रमण बच्चों के कानों तक फैल रहा है, जिससे बच्चे 'एक्यूट ओटाइटिस मीडिया' (एओएम ) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसमें तेज कान दर्द के साथ सुनने की क्षमता खोने (बहरापन) का खतरा होता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय पर उपचार न मिलने पर कान का पर्दा भी फट सकता है।
ईएनटी विशेषज्ञों के अनुसार नाक, कान और गला आपस में जुड़े होते हैं। सर्दी-जुकाम या गले के संक्रमण का समय पर इलाज न होने पर बैक्टीरिया और वायरस 'यूस्टेशियन ट्यूब' (नाक- कान को जोड़ने वाली नली) के जरिए कानों में पहुंच जाते हैं। इससे कान के मध्य हिस्से में सूजन, पस (मवाद) भरना और असहनीय दर्द शुरू हो जाता है।
स्थायी बहरापन: बार-बार संक्रमण से सुनने की शक्ति हमेशा के लिए जा सकती है। विकास में देरी: कम सुनाई देने के कारण बच्चों के बोलने और भाषा सीखने की गति धीमी हो जाती है।पर्दा फटना: मवाद का दबाव बढ़ने से कान का पर्दा डैमेज हो सकता है।छोटे बच्चों में कान में तेज दर्द, बुखार, बार-बार कान रगड़ना, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, दूध पीने में परेशानी और कान से सफेद या पीला तरल (पस) निकलना। बड़े बच्चों में: कान में भारीपन या दबाव महसूस होना, सिरदर्द और सुनने में कठिनाई।विशेषज्ञों के अनुसार, 6 माह से 5 साल तक के बच्चे, बार-बार सर्दी- खांसी की चपेट में आने वाले, बोतल से लेटकर दूध पीने वाले और धुएं या प्रदूषण में रहने वाले बच्चे इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
भोपालके हमीदिया और जेपी अस्पताल सहित निजी क्लीनिक के ईएनटी विभाग में रोजाना 10 से 12 ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में एओएम के मामले 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। हमीदिया अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. यशवीर के मुताबिक, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण गले का इंफेक्शन तेजी से कान तक पहुंचता है। जेपी अस्पताल में पिछले 15 दिनों में कई बच्चों को संक्रमण की गंभीरता के चलते भर्ती तक करना पड़ा है।
बच्चे को तेज बुखार हो, कान से पस निकले, दो दिन से ज्यादा दर्द रहे या सुनाई कम दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। गले के संक्रमण को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।