
MP News : मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग की सीटें बढ़ाए जाने के बावजूद छात्रों का रुझान इस शोबे से कम होता ही जा रहा है। तकनीकी शिक्षा विभाग (डीटीई) के 2026-27 के एडमिशन डेटा के अनुसार, बीईबीटेक में सीटों की संख्या 2,140 बढ़कर 76,862 हो गई, लेकिन प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या महज 97 ही बढ़ी है। इसके चलते इंजीनियरिंग का एडमिशन प्रतिशत पिछले साल के 63.05 से घटकर 61.42 फीसद ही रह गया है। इसके उलट बिजनेस मैनेजमेंट से जुड़े बीबीए पाठ्यक्रम में 65.54 फीसदी सीटों पर प्रवेश हुआ है।
आंकड़े बताते हैं कि, छात्र अब पारंपरिक इंजीनियरिंग के बजाय ऐसे कोर्स की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें उन्हें रोजगार और कॅरियर के अधिक विकल्प नजर आ रहे हैं। बीबीए में प्रवेश प्रतिशत इंजीनियरिंग से अधिक रहना इसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, विद्यार्थी अब सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार, पैकेज और इंडस्ट्री में अवसरों को भी देखा जा रहा है।
डिप्लोमा की स्थिति इस साल भी कमजोर रही। 2025-26 में 35,205 सीटों में से 24,714 पर प्रवेश हुए थे और एडमिशन प्रतिशत 70.20 रहा था। इस बार सीटें बढ़कर 35,493 हो गईं, लेकिन प्रवेश घटकर 23,315 ही रह गए हैं। इससे एडमिशन प्रतिशत भी घटकर 65.69 प्रतिशत हो गया है। यानी सीटों में बढ़ोतरी के बावजूद छात्रों की संख्या में कमी आई है।
एमबीए में भी छात्रों की रुचि में बड़ी गिरावट सामने आई है। इस साल 54,484 सीटों में सिर्फ 25,642 छात्रों ने प्रवेश लिया। एडमिशन प्रतिशत 47.06 रहा, यानी आधे से अधिक सीटें खाली रह गईं। पिछले साल 57,904 सीटों में 37,082 प्रवेश हुए थे और 64.04 प्रतिशत सीटें भर गई थीं। एक साल में एमबीए के प्रवेश प्रतिशत में करीब 17 प्रतिशत की गिरावट आई है।
प्रो. आशुतोष कुमार सिंह, डायरेखटर, ट्रिपल आइटी तकनीकी शिक्षा में अब केवल सीटों की संछया बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों के लिए रोजगार, पैकेज, इंडस्ट्री कनेखशन और ह्रश्वलेसमेंट सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं। ऐसे में संस्थानों को पाठ्यक्रमों की उपयोगिता बढ़ाने, उद्योगों से मजबूत जुड़ाव बनाने और बेहतर प्लेसमेंट का भरोसा कायम करने पर ध्यान देना होगा। छात्रों का भरोसा जीत ना ही अब सबसे बड़ी चुनौती है।