
Snake Bite (अस्पताल परिसर में तंत्र-मंत्र Photo Source- Input)
Katni News :मध्य प्रदेश के कटनी जिला अस्पताल में एक बार फिर अंधविश्वास और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच का खतरनाक चेहरा सामने आया है। सर्पदंश के बाद जिंदगी बचाने के लिए अस्पताल पहुंचे युवक को उसके परिजन उपचार के बीच वार्ड से बाहर ले आए और अस्पताल परिसर में ही करीब एक घंटे तक तांत्रिक से झाड़ - फूंक करवाते रहे। हैरानी की बात ये है कि, इस दौरान मरीज की हालत ठीक नहीं थी और उसे परिजन सहारा देकर लेकर आए थे। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस गतिविधि को रोकने या मरीज को दोबारा चिकित्सकीय निगरानी में लेने के लिए कोई जिम्मेदार मौके पर नहीं आया।
मामला जिले के माधवनगर थाना इलाके में आने वाले इमलिया गांव का है। यहां रहने वाले 29 वर्षीय सुमित पिता बसौरी कुमार को बीती रात करीब 3 बजे घर में सोते समय सांप ने काट लिया। सुमित पलंग पर पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ सो रहे थे। सांप के काटते ही उन्होंने शोर मचाया। आवाज सुनकर परिजन पहुंचे और आनन-फानन में उन्हें ऑटो से जिला अस्पताल लेकर आए।
रात में जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने सुमित का उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने दवा की डोज दी और उन्हें वार्ड में भर्ती कर लिया। सर्पदंश के मामले में मरीज को चिकित्सकीय निगरानी में रखना बेहद जरूरी होता है, लेकिन उपचार के दौरान राहत नहीं मिलने पर परिजनों ने अस्पताल के इलाज पर भरोसा रखने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लेने का फैसला कर लिया।
परिजनों ने पड़ोसी जिले उमरिया से एक तांत्रिक को बुला लिया। तांत्रिक के अस्पताल पहुंचने के बाद परिजन सुमित को वार्ड से बाहर लेकर आए। इसके बाद अस्पताल परिसर में ही तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक का सिलसिला शुरू हो गया। करीब एक घंटे तक यह गतिविधि चलती रही। इस दौरान मरीज की हालत ऐसी थी कि वह खुद सामान्य रूप से चलने की स्थिति में नहीं था। परिजन उसे सहारा देकर लेकर आए थे। इसके बावजूद कथित तांत्रिक अस्पताल परिसर में तंत्र विद्या करता रहा और परिजन उसके जरिए मरीज के ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे रहे।
सबसे बड़ा सवाल अस्पताल प्रबंधन पर खड़ा होता है। जिला अस्पताल कोई सार्वजनिक मैदान नहीं, बल्कि गंभीर मरीजों के उपचार का स्थान है। इसके बावजूद परिसर में करीब एक घंटे तक झाड़-फूंक होती रही। सवाल यह है कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मचारी, वार्ड कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम से अनजान कैसे रहे।
सर्पदंश के मामलों में मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। ऐसे में डॉक्टरों की निगरानी और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन यहां मरीज को चिकित्सकीय निगरानी से बाहर निकालकर करीब एक घंटे तक झाड़-फूंक कराई गई। इस दौरान यदि मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाती तो जिम्मेदारी किसकी होती।
Updated on:
17 Aug 2026 09:51 am
Published on:
17 Aug 2026 09:51 am
