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‘अफसरशाही की ढाल बनी सरकार’, छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत और भागीरथपुरा कांड पर उमंग सिंघार के सवाल

Umang Singhar Questions : भागीरथपुरा में जहरीले पानी से हुई मौतों और छिंदवाड़ा में कफ सिरप से 26 बच्चों की जान जाने के मामले में उमंग सिंघार ने एक बार फिर प्रदेश सरकार को घोरा है।
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Umang Singhar

उमंग सिंघार (फोटो सोर्स: Umang Singhar Facebook)

MP News : पिछले दिनों मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के बड़ी आबादी वाले क्षेत्र भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई कई मौतों और फिर छिंदवाड़ा में कफ सिरप से हुई कई बच्चों की मौतों का मामला एमपी की सियासत में एक बार फिर गर्माने लगा है। एमपी विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसपर प्रदेश सरकार से सवाल किए हैं।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक के बाद एक किए दो पोस्टों में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने के बाद गई 26 बच्चों की जान के मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

छिंदवाड़ा मामले पर उठाए सवाल

उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि, छिंदवाड़ा में 26 मासूम बच्चों की मौत पर मोहन सरकार का ये कैसा न्याय है? कफ सिरप कांड के गुनहगारों को सजा देने के बजाय पूरी सरकार भ्रष्ट अफ़सरशाही की ढाल बनकर खड़ी हो गई है।

1️-STF और विभागीय जांच के बीच जॉइंट ड्रग कंट्रोलर टीना यादव ने आरोपी ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और शरद कुमार जैन को बहाल कर दिया।

2️-स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल खुद को बेबस बताते हुए कह रहे हैं कि शासन की सहमति के बिना बहाली हुई!

3️-अब तीसरे आरोपी डिप्टी ड्रग कंट्रोलर शोभित कोष्टा की भी बहाली की पटकथा लिखी जा रही है।

अगर मंत्री के नाक के नीचे से आरोपी अफ़सर बहाल हो रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री और सरकार का संरक्षण है! क्या मोहन सरकार में भ्रष्टाचारियों का इतना रसूख है कि वे मासूमों की मौत के बाद भी कुर्सी पर बैठेंगे? 26 मासूमों के लहू का यह सौदा मध्य प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी!

भागीरथपुरा मामले पर सरकार से मांगी जवाबदेही

एक अन्य पोस्ट में उमंग सिंघार ने लिखा कि, '02 अक्टूबर को हमनें प्रेस वार्ता में बताया था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी ने लोगों की जान ली, परिवारों को अपनों से हमेशा के लिए जुदा कर दिया। जांच में दूषित पेयजल, प्रशासनिक लापरवाही, तकनीकी खामियां और फाइलों में हुई गंभीर देरी जैसे तथ्य सामने आए।

-एक महत्वपूर्ण फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिन तक लंबित रही, वहीं जरूरी इंजीनियरिंग रिकॉर्ड तक आयोग के सामने उपलब्ध नहीं कराए गए।

-इतनी गंभीर सच्चाई सामने आने के बाद भी भाजपा सरकार ने न मेयर को पद से हटाया, न जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की।

-जनता मरती रही, सिस्टम सोता रहा और भाजपा सरकार जिम्मेदारों को बचाती रही।

-अब सवाल सिर्फ भागीरथपुरा का नहीं, सरकार की जवाबदेही का भी है।

जब जांच रिपोर्ट में गंभीर तथ्य सामने आ चुके हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? रिपोर्ट को दबाने और उसके तथ्यों को छिपाने की कोशिश क्यों की गई? इंदौर के मेयर और संबंधित अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? भाजपा सरकार जवाबदेही से बच नहीं सकती, जनता के सवालों का जवाब देना ही होगा।