
Bhopal Retired IAS murder case:एमपी में भोपाल शहर के रिटायर्ड आइएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस नेआरोपी वरुण कुमार को सूरज नगर स्थित घटनास्थल पर ले जाकर वारदात का सीन रीक्रिएट कराया। पुलिस ने उससे घटनाक्रम को दोहराकर यह समझने की कोशिश की कि वह किस रास्ते से कमरे में दाखिल हुआ और सो रहे राकेश अग्रवाल का गला कैसे रेता और वारदात के बाद किस रास्ते से फरार हुआ। इस दौरान आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया शेविंग ब्लेड भी बरामद कर लिया गया। पुलिस ने वरुण से घर के उस कमरे की पहचान कराई, जहां राकेश अग्रवाल सो रहे थे।
इसके अलावा आरोपी को वह जगह भी दिखाई गई, जहां वह खुद सोता था और घर में सामान रखता था। जांच अधिकारियों ने उससे पूछताछ की कि वह राकेश अग्रवाल के कमरे तक कैसे पहुंचा और किस तरह वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद पुलिस उसे उन रास्तों पर भी ले गई, जिनका इस्तेमाल उसने हत्या के बाद भागने के लिए किया था। बता दें, न्यायालय ने उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी ने पहले से लूट की योजना बना रखी थी। पुलिस के मुताबिक, राकेश अग्रवाल की फटकार से वह गुस्से में आ गया और उसने उनकी हत्या कर दी। अब पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह, वारदात के पूरे घटनाक्रम और फरारी में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है।
पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी वरुण ने हत्या के बाद घर में आग और विस्फोट कराकर वारदात को हादसे का रूप देने की कोशिश की थी। इसके लिए उसने रसोई में रखे एलपीजी सिलेंडर की पाइप निकाल दी और प्रेस चालू कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की मंशा आग और विस्फोट में राकेश अग्रवाल का शव जलाने की थी, ताकि पुलिस को लगे कि उनकी मौत आग लगने से हुई है। वह चाहता था, हत्या के सबूत नष्ट हो जाएं और पुलिस इसे दुर्घटना माने। हालांकि, उसकी साजिश विफल हो गई और जांच में हत्या की परतें खुलती चली गईं।
इस घटना के बाद राजधानी में वरिष्ठ नागरिकों, मरीजों और अकेले रहने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत एक महत्वपूर्ण गाइडलाइन संबंधी आदेश जारी किया है। इसके तहत अब घरों में सेवा देने वाले निजी हेल्थ केयरटेकर, नर्सिंग अटेंडेंट और घरेलू परिचारकों का पुलिस सत्यापन (पुलिस वेरिफिकेशन) अनिवार्य कर दिया गया है। यह आदेश आगामी दो महीने तक प्रभावशील रहेगा। इसका उल्लंघन करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हाल के दिनों में घरों में काम कर रहे कर्मचारियों द्वारा अपराध का अंजाम देने की घटना के कारण यह नियम बनाया गया है।