
भोपाल। सरकार के विभिन्न विभाग अब आयोग में किसी तरह के पत्राचार सीधे नहीं कर सकेंगे। इन पत्रों को परीक्षण करने के लिए सीएस की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी।
कमेटी पहले विभागों के द्वारा भेजे गए पत्रों का परीक्षण करेगी इसके बाद ही उनको चुनाव आयोग के पास भेजेगी। जो प्रस्ताव आयोग के पास भेजने योग्य नहीं होंगे उनका निराकरण कमेटी खुद करेगी और विभागों को उसकी जानकारी देगी।
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद हर विभाग विभिन्न तरह के कार्यों, निविदाओं सहित अन्य तरह की अनुमतियों के लिए आयोग में पत्र भेज रहा है।
इनमें कई तरह की अनुमतियां ऐसे भी होती थी, जिनके संबंध में विभाग अपने स्तर पर खुद निर्णय ले सकता है कि उक्त अनुमतियों अथवा कार्यों को कराने से आदर्श आचार संहित का उल्लंघन होगा अथवा नहीं।
बताया जाता है कि आयोग के सुझाव पर सरकार सीएस की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने जा रही है। जिसमें जीएडी सहित अन्य विभागों के प्रमुख सचिव सदस्य होंगे। विभागों द्वारा विभिन्न अनुमतियों और कार्यों से जुड़े पत्रों को पहले कमेटी परीक्षण करेंगी। इसके बाद कमेटी यह तय करेगी कि कौन से प्रस्ताव को अयोग के पास भेजने की जरूरत है।
जो प्रस्ताव आयोग के पास नहीं भेजे जाएंगे उनकी अनुमति कमेटी देगी। अनुमति के साथ ही कमेटी द्वारा विभागों को अनुमतियों से जुड़े दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार आयोग ने विभाग को सुझाव दिए है कि जो कार्य जरूरी हों उसे के संबंध में आयोग के पास अनुमति के लिए पत्र भेज जाएं। अगर विभाग दो माह तक काम टाल सकते हो तो टाल दें, क्योंकि काम शुरू होने के बाद इसमें शिकवा-शिकायत होना शुरू हो जाता है।
अब इन पत्रों को परीक्षण करने के लिए सीएस की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी पहले विभागों के द्वारा भेजे गए पत्रों का परीक्षण करेगी इसके बाद ही उनको आयोग के पास भेजेगी। जो प्रस्ताव आयोग के पास भेजने योग्य नहीं होंगे उनका निराकरण कमेटी खुद करेगी और विभागों को उसकी जानकारी देगी।