Virendra Goyal - राजनीतिक नियुक्ति की पुष्टि किए बिना सिंगरौली विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष ने मनाया जश्न, गोयल आठ दिन तक जश्न में डूबे रहे; उप मुख्यमंत्री ने बधाइयां भी दे दीं, अब पता चला नियुक्ति आदेश फर्जी
Virendra Goyal - मध्यप्रदेश में नेताओं पर राजनीतिक नियुक्तियों का क्रेज इस कदर हावी है कि सोशल मीडिया पर आदेश मिलते ही बधाइयां लेकर मिठाइयां खाने और खिलाने लगते हैं। सिंगरौली विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल ने ऐसा ही किया। सोशल मीडिया पर दिखे नियुक्ति आदेश के आधार पर वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से बधाइयां लेने पहुंच गए। वे यहीं नहीं रूके, बल्कि उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से भी बधाइयां लीं और मिठाइयां भी खा ली। ईष्ट- मित्रों को भी खूब बांटी। इस मौके के फोटो, वीडियो शेयर हुए। गोयल इस तरह प्रदेश भर में 8 दिनों तक जश्न मनाते रहे। तमाम नेताओं से बधाइयां लेते गोयल के संबंध में नगरीय विकास विभाग के एसीएस को जब जानकारी मिली तो हकीकत सामने आई। पता चला कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने तो इस तरह का कोई नियुक्ति आदेश जारी ही नहीं किया।
तमाम नेताओं से बधाइयां भी ले लीं, उधर नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय दुबे ने मामले में संज्ञान लिया
प्रदेश में फिलहाल राजनीतिक नियुक्तियों का दौर है। 15 दिनों से एक के बाद एक आदेश आ रहे हैं। इसी बीच किसी ने गोयल की नियुक्ति वाला पुराना आदेश फर्जीवाड़ा कर जारी कर दिया। गोयल भी पुष्टि किए बिना जश्न मनाने निकल पड़े। तमाम नेताओं से बधाइयां भी ले लीं, उधर नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय दुबे ने मामले में संज्ञान लिया। तब गोयल को पूरा वाक्या पता चला।
सिंगरौली विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है, जो कि अभी तक नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक पद के लिए वीरेंद्र गोयल का ही नाम बताया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले पुरानी नियुक्ति निरस्त होगी, फिर नया आदेश जारी होगा।
शिवराज सरकार में की गई राजनीतिक नियुक्तियां मोहन सरकार ने जनवरी 2024 में निरस्त कर दी थीं। तब विभाग के अफसरों की गड़बड़ी के चलते सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे वीरेंद्र गोयल का नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुआ।
प्रमुख बिंदु
सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष का मामला
पूर्व अध्यक्ष ने नई नियुक्ति का मनाया जश्न
गोयल आठ दिनों तक बधाइयां लेते रहे
उप मुख्यमंत्री से भी ली बधाई
अधिकारी के संज्ञान पर पता चला नियुक्ति आदेश फर्जी
राजनीतिक नियुक्ति की पुष्टि किए बिना मान बैठे अध्यक्ष