
MP Police मध्यप्रदेश में अधिकारियों का अतीत उनका पीछा नहीं छोड़ रहा। उन्हें पुरानी करतूतें भारी पड़ रहीं हैं। सरकार कई अधिकारियों को पदोन्नत कर रही है लेकिन जैसे ही कुंडली खुलती है, हकीकत सामने आ जाती है। ऐसे में उन्हें मूल पदोें पर वापस भेज दिया जाता है। पिछले करीब 4 माह में प्रदेश के ऐसे 93 अधिकारियों को उनका दागी ट्रैक रिकॉर्ड भारी पड़ चुका है। उन्हें प्रमोशन देकर निरस्त कर दिया गया है। विभागीय जांच और आपराधिक प्रकरणों के चलते सरकार उनकी पदोन्नति का आदेश वापस ले चुकी है। इससे प्रशासनिक गलियारों में खलबली मची है।
प्रदेश के 15 पुलिस अधिकारियों की उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) पद पर पदोन्नति निरस्त कर दी गई है। इस संबंध में गृह विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। विभाग ने 13 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश में संशोधन करते हुए अधिकारियों का डीएसपी पद पर प्रमोशन रद्द किया है।
पदोन्नति देने के बाद अधिकारियों की कुंडली सामने आई। पता चला कि कोई अधिकारी विभागीय जांच में घिरा है तो किसी पर आपराधिक प्रकरण चल रहे हैं। पदोन्नत हुए कुछ अधिकारियों पर दंड प्रभावशील होने की भी बात सामने आई। इससे गृह विभाग के अधिकारी हैरान रह गए। विभाग ने तुरंत नया आदेश निकालकर उनकी पदोन्नतियां निरस्त कर दीं।
गृह विभाग के आदेश से प्रभावितों में 12 निरीक्षक शामिल हैं। इसके साथ ही विशेष शाखा की एक निरीक्षक, विसबल का एक निरीक्षक और एक रक्षित निरीक्षक की पदोन्नति भी वापस ली गई है।
इससे पहले 78 अधिकारियों की भी पदोन्नति वापस ली जा चुकी है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के आदेश के आधार पर पुलिस मुख्यालय भोपाल ने यह फैसला लिया था। पदोन्नत किए गए अधिकारियों को विभिन्न कारणों से प्रमोशन के लिए अनफिट माना गया था। पुलिस के 78 उप निरीक्षकों और कार्यवाहक निरीक्षकों को जुलाई में पदोन्नत किया गया था। इन्हें निरीक्षक बनाया गया था। 1 सितंबर को नया आदेश जारी कर प्रमोशन निरस्त कर दिया था। इनमें से कुछ अधिकारी विभागीय जांच में घिरे थे। कुछ पर आपराधिक प्रकरणों चल रहे थे।