
Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में रजिस्ट्री और नामांतरण के कामों को समान किया जाएगा। इसके लिए संपदा और साइबर तहसील के पोर्टल को आपस में जोड़ा जा रहा है। भूखंड, मकान की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण नहीं कराया है तो इसका अलर्ट मैसेज मोबाइल पर भेजकर अपडेट करने का कहा जाएगा। इससे जमीन और मकान विवाद कमी आएगी। हालांकि पूरे प्रोजेक्ट सबसे बड़ी चुनौती वही पटवारी आरआई, तहसीलदार है, जिन्हें ये काम करना है। अब पोर्टल मिलान कर सुविधा देने के साथ प्रशासन को ये सुनिश्चित करना होगा कि काम न करने का कोई नया तकनीकी बहाना न तलाश कर लिया जाए।
अभी संबंधित पटवारी, नजूल कार्यालय जाकर या ऑनलाइन प्रक्रिया से रजिस्ट्री के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई की जाती है। इन प्रकरणों को आरसीएमएस पोर्टल पर सुझाव आपत्ति के लिए रखा जाता है। ऑनलाइन ही आपत्ति की जा सकती है। इसके बाद नामांतरण हो जाता है। हालांकि महज 30 फीसदी लोग ही रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की ओर जाते हैं। अब इन्हें मैसेज से अलर्ट भेजकर प्रक्रिया तुरंत करने का मैसेज दिया जाएगा।
अभी संपदा 2.0 पर डिजिटली रजिस्ट्री हो जाती है। नामांतरण स्वतः नहीं होती है। इसके लिए सरकार के रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ी सायबर तहसील पोर्टल पर जाकर नामांतरण की प्रक्रिया करना होती है। नए बदलाव में शहरी क्षेत्र में भी रजिस्ट्री के बाद नामांतरण नहीं होता है तो रजिस्ट्री में दर्ज नाम और आधार नंबर के मुताबिक संबंधित को मैसेज भेजा जाएगा। इससे नामांनतरण की प्रकिया आसान व समय पर हो जाएगी।
रजिस्ट्री के बाद नामांतरण करना चाहिए। ये एक जरूरी दस्तावेज है, जिससे राजस्व रिकॉर्ड में डाटा अपडेट हो जाता है। इसके लिए प्रशासन कई तकनीकी बदलाव कर रहा है। आमजन को इसका लाभमिलेगा। -कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त
नामांतरण (जिसे दाखिल-खारिज या म्यूटेशन भी कहते हैं) वह कानूनी प्रक्रिया है जिसमें किसी जमीन, मकान या संपत्ति के सरकारी राजस्व दस्तावेजों (जैसे खसरा, खतौनी या बी-1) से पुराने मालिक का नाम हटाकर नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। इससे यह साबित होता है कि जमीन पर आपका कब्जा और अधिकार दर्ज हो चुका है। जमीन या मकान से जुड़े टैक्स (लगान) का भुगतान करने में आसानी होती है।भविष्य में संपत्ति से जुड़े विवाद या धोखाधड़ी से बचाव होता है।