Queen Ant Smuggling: क्वीन एंट स्मगलिंग की खबर ने भारतीय पर्यावरण एक्सपर्ट्स की नींद उडा़कर रख दी है। उन्हें चिंता है कि Messor Cephalotes जैसी विदेशी चींटियां अगर भारत पहुंच गई तो क्या होगा? प्रकृति को खूबसूरत बनाने में ये विदेशी चींटियां जितनी एक्सपर्ट हैं उतनी है खतरनाक भी
Queen Ant Smuggling: केन्या के नैरोबी एयरपोर्ट पर उस वक्त हर कोई हैरान था, जब वहां एक शख्स को 2200 जिंदा चींटियों से भरे बैग के साथ पकड़ा गया। मामला देखने-सोचने में भले ही अजीबो-गरीब लगा। चींटियों की तस्करी के इस मामले के सामने आने के बाद एक्सपर्ट्स चौंक गए हैं। इनकी मानें तो यह केवल कोई अनूठा या अलग सा दिखने वाला एक अजीबो-गरीब या महज एक आपराधिक मामला भर नहीं है, बल्कि प्रकृति के खिलाफ एक युद्ध है। यह मामला बड़े ट्रेंड की ओर इशारा करता है। इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
क्वीन एंट स्मगलिंग की खबर ने भारतीय पर्यावरण एक्सपर्ट्स की नींद उडा़कर रख दी है। उन्हें चिंता है कि Messor Cephalotes जैसी विदेशी चींटियां अगर भारत पहुंच गई तो क्या होगा? प्रकृति को खूबसूरत बनाने में ये विदेशी चींटियां जितनी एक्सपर्ट हैं उतनी है खतरनाक भी…patrika.com पर पढ़ें संजना कुमार की खास रिपोर्ट
केन्या के नैरोबी एयरपोर्ट (Nairobi's Jomo Kenyatta International Airport) पर पकड़े गए दो शख्सों में एक चायनीज नागरिक झांग केकू की मिलीभगत भी सामने आई है। इससे पहले कि वो तस्करी करने में सफल होते उन्हें पकड़ लिया गया। जब इनका बैग खोला गया, तो उसमें छोटी-छोटी दिखने वाली करीब 2200 जिंदा चीटियां छोटे-छोटे कैप्सूल्स में बंद थीं। बाद में सामने आया कि वह चींटियां चीन ले जाई जा रही थीं। इस मामले के सामने आने के बाद दुनियाभर के पर्यावरण वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यह छोटा-मोटा अपराध नही है बल्कि एक खतरनाक ग्लोबल ट्रेंड है, जो प्रकृति को विनाश की ओर ले जा सकता है।
2012 मूवी में दुनिया खत्म होने के डर से जब वैज्ञानिक कई जानवरों की प्रजातियों के साथ ही छोटे कीट तितलियों, मधुमक्खियों को भी बॉक्स में कैद कर लेते हैं, ताकि नई दुनिया बसाने में कोई दिक्कत न आए। मूवी का यह सीन Ark के अंदर का हिस्सा है, जहां दुनियां खत्म होने से पहले पृथ्वी की कुछ प्रजातियों को बचाने के लिए बनाया गया था। इसी के अंदर बना था 'Zoological Bay' , जहां इन्हें रखा जाता है।
इस फिल्म के ये सीन Ark 04 (जहाज 04) के अंदर के हैं, जहां मुख्य पात्र Jackson Curtis (John Cusack) और बाकी लोग छिपकर (stowed away) अंदर घुसते हैं। यह scene फिल्म का एक बहुत ही भावुक और महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह बताता है कि इंसान के अलावा प्रकृति को बचाने के लिए और भी प्रयास किए जा रहे थे, जिनके बिना पृथ्वी को फिर से बसाना नामुमकिन था। भले ही यह योजना फिल्म का एक गोपनीय हिस्सा थी, लेकिन इसे देखकर समझ आता है कि छोटे-छोटे जीव कैसे प्रकृति को बचाकर आम जनजीवन को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आज वाइल्ड लाइफ ट्रैफिकिंग बाघ की खाल या हाथी दांत तक सीमित नहीं रह गई है। अब छोटे-छोटे जीव जैसे चींटियां बायो पायरेसी का हिस्सा बनती जा रही हैं। लेकिन अब छोटे जीव, जैसे दुर्लभ चींटियां, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकने लगी हैं। एक्सपर्ट्स इसे Micro Wildlife Trafficking का नाम दे रहे हैं। इनका कहना है कि इन्हें छिपाना आसान है और पकड़ पाना उतना ही मुश्किल। इसके अलावा इनकी तस्करी से होने वाला मुनाफा भी तेजी से बढ़ रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये चींटियां सिर्फ एक साधारण कीट या जीव नहीं, बल्कि इकोसिस्टम की बैकबोन क्वीन आंट्स थीं हैं। इनकी खासियत यह है कि ये एक-एक चींटी अपनी एक कॉलोनी डेवलप करती है। ये मिट्टी को खोदकर सोइल एरिजन करती हैं। बीजों को फैलाकर प्लान्ट रीजनरेट करती हैं। कई पौधों की लाइफ साइकिल को सस्टेन करती हैं। गंदगी को साफ कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखती हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इन्हें इकोसिस्टम इंजीनियर्स कहते हैं।
इससे साफ है कि क्वीन आंट चींटिया नेचर के लिए वरदान हैं, जो गायब हो जाएं, तो अकेले जमीन पर ही उतना असर नहीं पड़ेगा, बल्कि फूड चेन भी प्रभावित होगी।
ये चींटियां मुख्य रूप से अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पाई जाती हैं। इसके अलावा वेस्ट एशिया और मिडिल ईस्ट भी इनका घर है। सूखे और गर्म इलाके इनका मुख्य हेबिटेट है। जहां ये रेत या सूखी मिट्टी के नीचे बीज जमा करती हैं और एक अंडरग्राउंड स्टोरेज बनाती हैं।
कई लोगों के दावे हैं कि क्वीन आंट्स का उपयोग यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं के रूप में भी किया जाता है। हालांकि अब तक ऐसी कोई मेडिकल रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जो इनके यौन वर्धक होने का दावा करती हैं। हां चीन में कुछ ट्रेडिशनल चाइनीज दवाओं में कुछ कीटों के साथ ही पॉलिरैचीज प्रजाति की ब्लैक आंट्स के पारंपरिक दावे जरूर मिलते हैं। लेकिन ये दावे भी केवल पारंपरिक है मॉडर्न क्लिनिकल ट्रायल्स से एप्रूव्ड नहीं हैं। और न ही मेसर सेफालोट्स यानी क्वीन आंट्स का इनसे कोई सीधा कनेक्शन ही है।
इसका कारण है। असली एग्जॉटिक पेट ट्रेड, रेयर स्पेसीज मार्केट आजकल दुनियाभर में क्वीन आंट कीपिंग का नया ट्रेंड बन गया है। लोग अपने घरों में क्वीन आंट्स से फॉर्मिक्वेरियम बनाकर पूरी कॉलोनी बनवाकर विकसित करते हैं। यानी एक क्वीन हजारों चीटिंयों का भविष्य है। यही कारण है कि रेयर प्रजातियों की क्वींस की इंटरनेशनल बाजार में मांग बढ़ी है।
बाहर से बिल्कुल छोटा सा नजर आने वाला चींटियों का बिल जमीन के नीचे एक पूरा अंडरग्राउंड सिटी जैसा होता है। कई बास वैज्ञानिक इस पर रिसर्च भी करते रहे हैं। इनके घरों को अंडरग्राउंड सिटी सिस्टम कहा जाता है। जिसमें कई कमरें या चैंबर और सुरंग बने होते हैं।
क्वीन चैंबर की बात करें तो यह सबसे सुरक्षित और सबसे गहराई में बना होता है। यहां क्वीन एंट रहती है और अंडे देती है।
ब्रूड चैंबर यानी अंडे या लार्वा का कमरा। इसी में क्वीन एंट के अंडे, लार्वा और प्यूपा रखे होते हैं। वर्कर चींटियां इनका खास ख्याल रखती हैं।
फूड स्टोरेज के लिए कई चैंबर होते हैं। खासकर Messor Cephalotes जैसी हार्वेस्टरक चींटियां होती हैं। बीज जमा करके अलग-अलग कमरों में स्टोर करती हैं।
वेंटिलेशन के लिए टनल्स का रास्ता बनाती हैं। इन टनल से ही ऑक्सीजन अंदर आती-जाती है। यही टनल तापमान के साथ ही नमी को भी कंट्रोल रखती हैं।
सबसे ज्यादा दिलचस्प ये जानना है कि गर्मियों में चींटियां और गहराई में चली जाती हैं। बारिश में इनके ऊपरी चैंबर में चहल-पहल दिखाई देती है। ये चींटियां ऐसा घर तैयार करती हैं, जिसमें बारिश के दिनों में भी जरा भी पानी जमा नहीं होता और हवा भी अंदर आती जाती रहती है।
यानी एक छोटा सा दिखने वाला बिल उसके नीचे देखो तो एक संगठित अंडरग्राउंड सिटी जिसमें हर चींटी की अपनी भूमिका भी तय होती है कि उसे क्या करना है।
डॉ. सुभाष बताते हैं कि Messor cephalotes जैसी विदेशी हॉर्वेस्टर चींटियां भारत की मूल प्रजाति नहीं हैं। अगर इनकी तस्करी कर इन्हें यहां लाया जाता है, तो यह केवल एक अवैध व्यापार नहीं बल्कि स्थानीय जैव विविधता के लिए एक छिपा हुआ खतरा बन जाएगा। सबसे ज्यादा असर वेस्टर्न घाट और नॉर्थ ईस्ट के जैवविविधता संपन्न हॉटस्पॉट्स के लिए ये खतरा साबित हो सकती हैं।
'भारत में यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाई जातीं। हां लेकिन एक्सॉटिक पेट ट्रेंड के कारण ये अवैध तरीके से यहां लाई जा सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत के इनवेसिव स्पीशीज के लिए खतरा बन सकती हैं। दरअसल ये चींटियां जहां नेचर के लिए बेहद जरूरी हैं, वहीं ये किसी और क्षेत्र में जाकर स्थानीय और प्राकृतिक रूप से वहां रहने वाली चींटियों से प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं। फसल और बीज चक्र को प्रभावित कर सकती हैं। नई जगह पर तेजी से फैलकर वहां के इकोसिस्टम को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।'केन्या की ये घटना संकेत है कि तस्करों का नेटवर्क अब इकोसिस्टम की बुनियादी कड़ियों तक पहुंच चुका है। मेसर सेफालोट्स भले ही भारत में नहीं हैं, लेकिन इनकी तस्करी की आशंका से इनकार भी नहीं किया जा सकता।
जब हजारों क्वीन आंट्स को उनके हैबिटेट से निकाल लिया जाएगा तो नई कॉलोनियां बनना बंद हो जाएंगी। मिट्टी की उर्वरता के साथ ही पौधों की डायवर्सिटी में कमी आएगी। पूरा इकोलॉजिकल बैलेंस गड़बड़ाने लगेगा। यानी यह सिर्फ चींटियों की तस्करी का मामला नहीं है। बल्कि पूरे इकोसिस्टम पर सीधा हमला है। खतरनाक बात यह है कि यह सब चुपचाप हो रहा है, बिना कोई अटेंशन लिए। हालांकि ये तस्करी बड़े जानवरों जितनी विजिबल नहीं है, लेकिन इनका असर उतना ही गहरा और लंबा है। अब जब चींटियां बिकने लगें तो नेचर को खतरा मामूली नहीं, बहुत बड़ा है।-डॉ. सुभाष सी. पांडे, पर्यारण एक्सपर्ट, भोपाल