Mohan Nagar Bungalow Dispute: राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मोहन नागर जन अभियान परिषद के लिए सरकारी बंगला आवंटित कराने में कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह से एक कदम आगे निकल गए। उनके पावर के आगे गृह विभाग ने 45 बंगला क्षेत्र स्थित ई-8 सरकारी बंगला जन अभियान परिषद को आवंटित कर दिया। मंत्री कुशवाह उसी बंगले […]
Mohan Nagar Bungalow Dispute: राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मोहन नागर जन अभियान परिषद के लिए सरकारी बंगला आवंटित कराने में कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह से एक कदम आगे निकल गए। उनके पावर के आगे गृह विभाग ने 45 बंगला क्षेत्र स्थित ई-8 सरकारी बंगला जन अभियान परिषद को आवंटित कर दिया। मंत्री कुशवाह उसी बंगले को राज्य सामान्य वर्ग कल्याण आयोग के लिए आवंटित कराने गृह विभाग के चक्कर काटते रह गए। यहां तक कि गृह अपर मुख्य सचिव के नाम चार चिट्ठियां लिखीं, लेकिन वे सब बेअसर रहीं।
असल में रंग महल चौराहे के पास ई-8 का बंगला आयोग को आवंटित था। आयोग के पदेन अध्यक्ष नारायण सिंह कुशवाह हैं। वे मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। कामकाज को लेकर आयोग के दफ्तर में आना-जाना लगा रहता है।
मंत्री कुशवाह को पता चला कि बंगले की आवंटन अवधि खत्म हो गई है तो उन्होंने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिख बंगला पुन: आयोग के लिए आवंटित करने का अनुरोध किया। उन्होंने चार पत्र लिखे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी तरफ गृह विभाग ने 25 नवंबर को परिषद को बंगला आवंटित कर दिया।
कुछ नेता, अफसर और पावरफुल कहे जाने वाले लोगों की एक बड़ी फौज सरकारी बंगला पाने के लिए जुटी है तो वहीं जो पूर्व में बंगला पा चुके वे अयोग्य होने के बावजूद खाली करने को तैयार नहीं। अचरज यह है निर्माण के समय जो लागत आई थी उससे कई गुना राशि रंग-रोगन के नाम पर खर्च की जा चुकी है। यानी किसी बंगले के निर्माण पर 25-30 लाख रुपए खर्च हुए होंगे तो उसी का रंग-रोगन करने के नाम पर 2 से 5 करोड़ रुपए फूंक दिए। ये पैसे जनता के थे।
गृह अवर सचिव अन्नू भलावी के नाम से जारी आदेश में परिषद को बंगला आवंटन का जो पत्र दिया, उसी पत्र की सबसे अंतिम लाइन में लिखा है कि यह बंगला तीन साल के लिए आवंटित किया जाता है, लेकिन शर्त यह भी लगाई कि आवंटन खाली होने की प्रत्याशा में किया जा रहा है। यानी खाली होने पर ही कजा करना था, लेकिन आयोग बंगला खाली करता उसके पहले ही परिषद के अधिकारियों ने बंगले के एक हिस्से में ताला जड़ दिया। रंग-रोगन भी शुरू करा दिया, जबकि बंगले के एक हिस्से में अभी भी आयोग का कार्यालय चल रहा है।
जन अभियान परिषद को बंगला आवंटित हुआ है, इसलिए एक दिन गए थे। साफ- सफाई करवा रहे हैं। आयोग का कार्यालय पूर्व की तरह यथावत चल रहा है। उसमें किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं किया और न ही करेंगे।
-डॉ. बकुल लाड, कार्यकारी निदेशक, जन अभियान परिषद