नाव डूबते ही पानी में तुरंत कूद गया। पांच से छह युवकों को ही बचा पाया। डूबने वाले इतने थे कि मैं अकेले सबको नहीं बचा पाया।
भोपाल. जब नाव डूबी तो भोइपुरा के नितिन बाथम घाट के किनारे खड़े थे। बाथम का कहना है कि नाव डूबते ही पानी में तुरंत कूद गया। पांच से छह युवकों को ही बचा पाया। डूबने वाले इतने थे कि मैं अकेले सबको नहीं बचा पाया। नाविक नहीं भागते और बचाने की कोशिश करते तो शायद कुछ और की भी जान बच सकती थी।
छोटा तालाब के खटलापुरा घाट पर शुक्रवार तड़के गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान नाव पलटने से 11 युवकों की डूबकर मौत हो गई। छह लोगों को बचा लिया गया। घटनास्थल के समीप एसडीआरएफ, होमगार्ड व पुलिस के मुख्यालय हैं। इसके बावजूद घाट पर हादसा रोकने खास प्रबंध नहीं किए गए।
बड़े अफसरों पर नहीं की कार्रवाई
सरकार ने किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की है। छोटे ही कर्मचारियों को जिम्मेदार मानकर एक्शन लिया है।
नगर निगम: वहां गोताखोर नहीं थे। गहरे पानी में जाने से रोकने रस्सी तक नहीं लगी थी। सिर्फ कार्यपालन यंत्री आरके सक्सेना व अग्रिशमन अधिकारी साजिद खान को ही निलंबित किया है।
MUST READ : बेटे की लाश देखते ही फफक-फफक कर रो पड़ी मां
पुलिस: 15 पुलिसकर्मी तैनात थे। महिला थाना टीआई की ड्यूटी थी। वह नदारद थीं। बड़ी मूर्ति होने पर नाविकों को नहीं रोका। सिर्फ एएसआई शिववचन यादव को कर दिया निलंबित।
एसडीआरएफ: एक सदस्य मौजूद नहीं था। घटना के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। ऑपरेशन में ही नाव में क्षमता से अधिक लोगों को बैठा लिया।
जिला प्रशासन: आरआइ अनिल गव्हाने को प्रभारी के रूप में दो बजे के बाद रहना था। वे युवकों को रोकने में विफल रहे। इन्हें फिलहाल निलंबित कर दिया।
लापरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
बेहद दु:खद घटना है। सरकार पीडि़त परिवारों के साथ है। जिसकी भी लापरवाही होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। -कमलनाथ, मुख्यमंत्री
घटना में कलेक्टर और कमिश्नर जिम्मेदार
घटना में कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर जिम्मेदार हैं। इनका काम है कि घाट पर गोताखोरों की व्यवस्था रखें। पुलिस-होमगार्ड की जिम्मेदारी है कि नाव में अधिक लोगों को न बैठने दिया जाए।
-शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सीएम
जो जिम्मेदार, उनके ही हाथों में जांच
जिस जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली कठघरे में है, वे ही अब जांच करेंगे। मजिस्ट्रेट जांच एडीएम सतीश कुमार को सौंपी गई है। सवाल है, क्या इस जांच में पारदर्शिता रहेगी। खटलापुरा घाट पर बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था नहीं थी। तो फिर नगर निगम, पुलिस और प्रशासन ने क्रेन क्यों वहां रख रखी थी। क्या एडीएम स्तर की जांच बड़े अफसरों की जिम्मेदारी तय कर पाएगी?
MUST READ : ये है 5 बड़े कारण, इस वजह से गई 11 लोगों की जान
सीएस मोहंती बोले- बड़े अफसरों का इसमें क्या दोष
बड़े अधिकारियों का क्या दोष है। कलेक्टर तत्काल पहुंच गए थे। 5 बजे मेरे पास फोन आ गया। धारा 144 की पालना के लिए वहां अफसर थे। ऐसी घटनाएं फिर न हों, इसके लिए निर्देश दिए हैं।- एसआर मोहंती, सीएस
मंत्री बोले- निलंबित करो
मंत्री पीसी शर्मा ने संभागायुक्त को पत्र लिखकर कहा कि हादसे की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। लिखा, यह घटना प्रशासन की लापरवाही से हुई है। घाट पर ड्यूटी वाले बड़े अफसर होते तो घटना टल सकती थी। दोषी निलंबित होना चाहिए।
MUST READ : मृतकों के परिजन को 11-11 लाख रुपये देने की घोषणा
जिला प्रशासन द्वारा तैनात किए गए मजिस्ट्रेट डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार या नायब तहसीलदार, पुलिस के अधिकारी, सिपाही एवं गोताखोर मौजूद होते तो 11 लोगों की अकाल मृत्यु टाली जा सकती थी। इसलिए अनुरोध है कि इस प्रशासनिक लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी जो खटलापुरा घाट में तैनात किए गए थे उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश प्रदान करें।
4 नाविक ही गिरफ्तार क्यों
पुलिस ने नाविक आकाश, चंगु, शुभम और अभिषेक बाथम को दोषी मानते हुए गिरफ्तार किया।