
CM Mohan Yadav- - सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भोपाल में रिहायशी इलाकों से कमर्शियल एक्टिविटी बंद कराने की कार्रवाई पर आंशिक ब्रेक लग गया है। इसके अंतर्गत अब तक शहर के 1250 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं। कई बड़े शोरूम, होटल्स, रेस्त्रां पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। मालिक और संचालक इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में सीएम मोहन यादव ने दुकानदारों को बड़ी राहत देते हुए फिलहाल सख्त कार्रवाई नहीं करने के अधिकारियों को निर्देश दिए। सीएम की बैठक बुलाकर एक उच्चस्तरीय समिति बनाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का गहराई से अध्ययन कर यह समिति पूरे मामले की जांच कर सरकार को रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी। सीएम मोहन यादव ने व्यापारियों से साफ कहा है कि अब उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। समिति की रिपोर्ट आने तक प्रतिष्ठान चालू रखे जा सकेंगे।
राजधानी में रिहायशी इलाकों में बाजार पर टकराव बढ़ गया है। लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस बीच प्रशासनिक कार्रवाई रविवार को भी जारी रही। वहीं, प्रतिष्ठानों को सील करने का सिलसिला भी जारी है। कार्रवाई के चलते अरेरा, 10 न्बर सहित जद में आ रहे मार्केट बंद रहे।
इधर अब कार्रवाई के विरोध और समर्थन को लेकर लोगों में टकराव भी बढ़ रहा है। कार्रवाई को दिखावा बताकर रहवासी संगठनों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। अरेरा कॉलोनी, गौतम नगर, रचना नगर के रहवासी संगठन के साथ भोपाल के पूर्व संभाग आयुक्त कवींद्र कियावत भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे व्यवस्थित बाजार और रहवासी क्षेत्र निर्धारित नहीं हो जाते तब तक प्रदर्शन जारी रखेंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि जो सांसद, विधायक, पार्षद आज चुपचाप बैठे हैं, चुनाव में बहिष्कार करेंगे।
रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर नगर निगम सख्ती दिखा रहा है। उसने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की जिससे व्यापारी थर्रा उठे। संचालकों, मालिकों ने राज्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाई।
इसके बाद सीएम डॉ. मोहन यादव आगे आए। उन्होंने प्रदेश सरकार के मंत्रियों विश्वास सारंग और कृष्णा गौर के अलावा विधायकों रामेश्वर शर्मा व भगवानदास सबनानी को बुलाया। मंत्रियों, विधायकों के साथ सीएम मोहन यादव ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे मामले का जायजा लिया।
बैठक में आगे की कार्रवाई से पहले एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का फैसला लिया गया। यह समिति मामले से संबंधित सभी पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसकी सिफारिशों के आधार पर ही सरकार आगे की कार्रवाई तय होगी। तब तक नगर निगम को सख्त कार्रवाई से मना कर दिया गया है।