
Bhopal news: मध्यप्रदेश में भोपाल शहर में हाउसिंग बोर्ड ने एक बार फिर से आवासीय में व्यावसायिक गतिविधि पर कार्रवाई की। शहर में 32 लीज निरस्त कर दी गई। ये अयोध्या नगर और बाग मुगालिया से जुड़े मकान है। यहां दुकानें बना ली गई थी और शॉपिंग सेंटर के तौर पर उपयोग किया जा रहा था। बोर्ड ने इन्हें पहले ये काम बंद करने का नोटिस दिया, फिर लीज निरस्त कर इन संपत्तियों को अधिग्रहित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड की ओर से 200 नोटिस जारी है।
इस समय हाउसिंग बोर्ड के साथ भोपाल विकास प्राधिकरण के लीज वाली 07 हजार संपत्तियां लीज शर्त का उल्लंघन के दायरे में है। भोपाल में बोर्ड की 40 साल पुरानी मल्टियां, मकान व कॉलोनियां है। इनमें 12 हजार से अधिक परिवार रहते हैं। कब्जों और अवैध निर्माण को लेकर ये शिकायत करते हैं।
32- भोपाल
26- जबलपुर
11- ग्वालियर
10- उज्जैन
-शास्त्री नगर में तो ईडब्ल्यूएस घरों को मिलाकर ऊंची बिल्डिंग बना ली। शॉपिंग सेंटर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तक बना लिए। अब कार्रवाई जारी रहे तो नगर निगम के बाद हाउसिंग बोर्ड और बीडीए की ओर से बड़ी संख्या में कारोबार बंद कराया जा सकता है।
-भोपाल में अयोध्या नगर, बायपास से लेकर नेहरूनगर, कोटरा, सुभाष कॉलोनी, बैरसिया रोड, तुलसी नगर, बिट्टन मार्केट, रविशंकर मार्केट व संबंधित क्षेत्र हाउसिंग बोर्ड ने ही विकसित किए। कोलार में वंदना नगर, अशोका गार्डन, रायसेन रोड, अस्सी फीट रोड, रचना नगर, गौतम नगर समेत टीटी नगर, शास्त्री नगर, सरस्वती नगर अन्य क्षेत्रों में बोर्ड की संपत्ति है।
-अशोका गार्डन अस्सी फीट रोड पर हाउसिंग बोर्ड की आवासीय मल्टी में नीचे बड़ी फ्रेंचाइजी को जगह दे दी गई।
-जवाहर चौक के पास हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी में 450 वर्गफीट में आवंटित मकान को पांच मंजिला तक बनाकर किसी बहुमंजिला इमारत बना दिया जिससे पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था हो रही।
लीज शर्तों का उल्लंघन करने वालों को भोपाल समेत प्रदेशभर में नोटिस दे रहे हैं। लीज निरस्तीकरण की कार्रवाई भी साथ में चालू है। - सुनीता लाल, मुख्य संपदा अधिकारी, हाउसिंग बोर्ड
सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट मनाही के बाद भी शहर के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी डेवलपमेंट के लिए बैंकों द्वारा भारी-भरकम लोन बांटे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, बिजली विभाग बिना किसी कमर्शियल अनुमति की जांच किए इन अवैध परिसरों को तुरंत व्यावसायिक बिजली कनेक्शन जारी कर रहा है। वहीं, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (खाद्य विभाग) भी रिहायशी मकानों में खुलने वाले रेस्तरां, कैफे और दुकानों को आंखें मूंदकर फूड लाइसेंस बांट रहा है।