भोपाल

‘Google’ पर बीमारी सर्च करना खतरनाक, अगर आप भी करते तो हो सकते मानसिक रोगी…

Health news: लोग सर्च इंचन पर बीमारियों की पड़ताल करते हैं और बीमार होने से पहले ही उनमें कैंसर, हार्ट अटैक, किडनी खराब और अन्य गंभीर बीमारियों का भय बैठ जा रहा है

2 min read
Feb 12, 2026
cyberchondria (Photo Source - Patrika)

Health news: इलाज से पहले मरीजों का इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बीमारियों के लक्षण व उपचार खंगालने की लोगों की आदत अब एक बीमारी बनती जा रही है। इसके साथ ही डॉक्टरों पर उनका भरोसा भी टूट रहा है। दरअसल ऑनलाइन प्लेटफार्म पर दी जाने वाली आधी-अधूरी व डराने वाली स्वास्थ्य जानकारियां लोगों को गुमराह करने के साथ ही उन्हें मानसिक बीमार भी बना रही हैं।

लोग सर्च इंचन पर बीमारियों की पड़ताल करते हैं और बीमार होने से पहले ही उनमें कैंसर, हार्ट अटैक, किडनी खराब और अन्य गंभीर बीमारियों का भय बैठ जा रहा है। भोपाल में इस तरह की प्रवृत्ति बढऩे को साइबर कॉन्ड्रिया कहा जा रहा है। इसमें मरीज बीमारी से ज्यादा इलाज और दवाओं के साइड इफेक्ट्स से घबराने लगे हैं। परिणामस्वरुप लोग या तो समय पर इलाज नहीं करवा रहे हैं या फिर बीच में ही दवा खाना छोड़ दे रहे हैं। ऐसे मरीजों के इलाज से पहले डॉक्टरों को पहले काउंसलिंग करनी पड़ रही है।

ये भी पढ़ें

काटे जाएंगे बिजली के ‘5 साल’ पुराने अस्थायी कनेक्शन, देंने होंगे 80 हजार रुपए !

केस-1: कैंसर का शक और गूगल का डर

एम्स में ब्रेन की सर्जरी के बाद भोपाल की 45 वर्षीय सुशीला कश्यप (परिवर्तित नाम) का रिश्तेदार एमआइसीयू में भर्ती था। न्यूरो विशेषज्ञ ने बताया कि मरीज 30 प्रतिशत सांस वेंटीलेटर से ले रहा है। वेंटीलेटर से हटाने के उसकी सांस रुक जाएगी। लेकिन सुशीला मोबाइल दिखाकर डॉक्टरों को बता रही है कि इंटरनेट में बता रहा है कि मेरा मरीज स्वस्थ हो गया है। डॉक्टरों ने बताया कि साइबर कॉन्ड्रिया का शिकार होने के कारण सुशीला डॉक्टर की बात पर विश्वास नहीं कर पा रही है।

केस-2: दवा छोड़ी, बीमारी बढ़ी

भोपाल के 48 वर्षीय डायबिटीज मरीज विवेक यादव ने इंटरनेट पर दवा के साइड इफेक्ट्स पढऩे के बाद बिना डॉक्टर को बताए दवा बंद कर दी। कुछ ही दिनों में शुगर अनियंत्रित हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार डर से दवा छोडऩा बीमारी से ज्यादा नुकसानदेह साबित हुआ।

विशेषज्ञों की चेतावनी

इंटरनेट जानकारी दे सकता है, निदान नहीं। इलाज का फैसला डॉक्टर और मरीज की बातचीत से होना चाहिए, एल्गोरिदम्म से नहीं। लेकिन इंटरनेट पर लक्षण की तलाश कर अपनी बीमारी के बारे में पता लगाने वालों की संख्या बढ़ रही है। यह मानसिक रोग है। समय रहते इस पर रोकथाम जरूरी है। डॉ. तन्मय जोशी, मनोरोग विशेषज्ञ, एम्स

ये भी पढ़ें

Mahakal: 15 फरवरी को मध्यरात्रि तक खुले रहेंगे पट, 16 को दिन में होगी ‘भस्म आरती’

Published on:
12 Feb 2026 12:09 pm
Also Read
View All

अगली खबर