भोपाल

एम्स रिसर्च: पेट के कैंसर से हो रही 40% मौतें, शरीर में ये 6 लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

cancer: एम्स भोपाल के अध्ययन में ठोस ट्यूमर वाले कैंसर मरीजों की मौतों में करीब 40 प्रतिशत पाचन तंत्र के कैंसर से जुड़ी पाई गईं, जबकि ब्लड कैंसर में एएमएल के मामले सबसे अधिक रहे।
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Oct 05, 2026
पेट का कैंसर, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
पेट का कैंसर, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

AIIMS Bhopal: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजन के लिए सबसे बड़ी चिंता इस गंभीर बीमारी से जूझते हुए जान जाने के खतरे की रहती है। इसी को ध्यान में रख एमपी में एम्स भोपाल ने अपने अध्ययन में शामिल कैंसर मरीजों की मौतों के पैटर्न का विश्लेषण किया है। अध्ययन के अनुसार ठोस ट्यूमर वाले मरीजों की मौतों के विश्लेषण में करीब 40 प्रतिशत मौतें पाचन तंत्र के कैंसर से जुड़ी पाई गई।

अध्ययन करने वाली मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा चौधरी ने स्पष्ट किया है कि मौत का यह प्रतिशत केवल अध्ययन में दर्ज मौतों के बीच का अनुपात है, न कि कैंसर की कुल मृत्यु-दर या पूरी आबादी पर लागू होने वाला आंकड़ा। हालांकि इस तरह के पैटर्न से यह पहचानने में मदद मिलती है कि इलाज और मरीजों की देखभाल के किन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। डॉ. चौधरी और डॉ. कवल पंडित के इस अध्ययन के निष्कर्ष बेंगलूरु में 24 से 27 सितंबर तक आयोजित आईएसएमपीओसीओएन-2026 (इंडियन सोसाइटी ऑफ मेडिकल एंड पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी) के वार्षिक सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए।

ब्लड कैंसर में दर्ज मौतों की संख्या अधिक

रक्त और लसीका तंत्र के कैंसर में एएमएल (एक्यूट माइलॉइड ल्यूकेमिया) के मरीजों में दर्ज मौतों की संख्या सबसे ज्यादा रही। विश्लेषित की गई कुल मौतों में 40 से 60 वर्ष की आयु वर्ग के मरीजों का अनुपात सबसे ज्यादा था। डॉ. चौधरी के अनुसार पाचन तंत्र के कैंसर में सरवाइवल रेट (जीवन रक्षा दर) कैंसर के प्रकार और उसकी स्टेज के अनुसार काफी भिन्न होता है। एक अन्य अध्ययन के अनुसार एएमएल के मरीजों में 5 वर्षीय सरवाइवल रेट 35.5 प्रतिशत पाया गया है, जबकि पेट के कैंसर में यह दर 12 से 13 प्रतिशत और भोजन नली के कैंसर में 13 से 14 प्रतिशत तक है।

ये होते हैं पेट कैंसर के लक्षण

-लगातार अपच या सीने में जलन
-पेट में दर्द या ऊपरी हिस्से में बेचैनी
-थोड़ा सा खाना खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना
-भूख में कमी
-बिना किसी कारण के वजन कम होना
-काले रंग का मल आना या मल में खून आना

इलाज की दिशा में मिलेगी मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि मौतों के इन पैटर्न का विश्लेषण करने से इलाज, समय पर देखभाल और सहयोगी चिकित्सीय सेवाओं में सुधार लाने वाले क्षेत्रों की सटीक पहचान की जा सकती है। इससे भविष्य में कैंसर मरीजों की देखभाल और चिकित्सा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में अहम मदद मिलेगी।

Updated on:
05 Oct 2026 12:44 pm
Published on:
05 Oct 2026 11:23 am