
MP News :मध्य प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों और महिला - युवतियों के लिए 6 माह से बंद पोषण आहार वितरण को देखते हुए सरकार ने राज्य आजीविका मिशन से वितरण व्यवस्था छीन ली। अब ये काम पहले की तरह महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) विभाग को दे दिया गया है। जुलाई अंत तक ये व्यवस्था बहाल होगी। इस व्यवस्था पर हर साल 1200 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। ये दूसरा मौका है, जब मिशन से यह जिम्मा छीना गया है। दावा है कि, नई व्यवस्था से बच्चों, महिला - युवतियों को समय पर और गुणवत्ता युक्त पोषणाहार मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट में ये फैसला हुआ। सरकार के दिए 140 करोड़ से लगे 7 प्लांट भी आजीविका मिशन ठीक से नहीं चला सका। यह करीब 250 करोड़ के घाटे में चले गए। इससे 65 लाख बच्चे और 15 लाख महिलाओं को नियमित पोषणाहार नहीं मिल रहा था। कैबिनेट ने 10,800 करोड़ रुपए की 15 से अधिक योजनाओं की निरंतरता समेत अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। अब अगली कैबिनेट भोपाल के पास जगदीशपुर में 19 जुलाई को होगी। इसमें समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक लाया जाएगा।
पहले आंगनबाड़ी केंद्र सामग्री खरीदते थे। बाद में सामग्री खरीद-सप्लाई ठेके पर दिए। 2018 में यह काम पंचायत- ग्रामीण विकास के अधीन राज्य आजीविका मिशन को दिया। क्र140 करोड़ भी दिए। मिशन ने 7 प्लांट लगाए, राशन आपूर्ति शुरू की। कई शिकायतों के बाद 2022 में मिशन से काम छीना, पर फिर से देना पड़ा। अब यह काम डब्ल्यूसीडी को दिया। मिशन से 7 संयंत्र वापस नहीं लिए जाएंगे।
1-टेक होम राशन वितरण तुरंत शुरू होगा। शॉर्ट टाइम टेंडर होने तक स्वसहायता समूह राशन तैयार करेगा। केंद्रों-महिलाओं तक पहुंचाएगा। केंद्रों में सहायिका भोजन पकाकर परोसेंगी।
2-8 से 10 महीने के लिए शॉर्ट टेंडर होंगे। तय एजेंसियों से राशन सामग्री ली जाएगी। सप्लाई भी वही करेंगे। चूंकि केंद्र टेक होम राशन पर प्रति बच्चे-महिला राशि बढ़ा रहा है। ऐसे में एकमुश्त 3 या 5 साल के टेंडर नहीं होंगे।
3-जब केंद्र राशि बढ़ाएगा तो राज्य में भी प्रति बच्चे व महिलाओं पर खर्च की समीक्षा होगी। राशि बढ़ाई जाएगी। तब 3 या 5 साल के लिए टेक होम राशन वितरण का टेंडर होगा।
-कुंडलिया सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 245.45 करोड़।
-मूंग खरीदी के लिए एजेंसी को 1,587 करोड़ का कर्ज मिलेगा।
-नगरीय क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास पर 8 हजार 445 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
-वाणिज्यिक कर विभाग के कार्यालय को 521.4 करोड़ रुपए।
प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्र लगातार अपग्रेड किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और विभागीय अफसरों की टीम ने 73 स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा था। सूत्र बताते हैं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रस्ताव ये कहकर लौटा दिया कि, अपग्रेड करने में आपत्ति नहीं है। लेकिन भवन बनने और उपकरण खरीदने के बाद भी डॉक्टर नहीं मिलते। इस तरह अपग्रेड करने से जनता को कोई लाभ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि, जिन केंद्रों में डॉक्टरों की कमी है, उन्हें पहले भरा जाए। तब इन केंद्रों को अपग्रेड करने पर विचार किया जाएगा। अलग-अलग कारणों से कैबिनेट से इस बार दो अन्य प्रस्तावों को भी लौटाया गया है।
प्रदेश में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से अच्छा हुआ है। मॉडर्न उपकरणों की खरीदी पर भी मोटी राशि खर्च की जा रही है। लेकिन अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी नहीं दूर हो पा रही। विशेषज्ञ डॉक्टरों के 3698 और मेडिकल ऑफिसर्स के 2689 पद खाली हैं। विभाग को इसी कमी को दूर करने के लिए कहा गया। लेकिन यह कमी दूर नहीं हो सकी। अब और गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
-29 उप-स्वास्थ्य केंद्रों को 6 बेड के पीएचसी में, 19 पीएचसी को 30 बेड के सीएचसी में, 18 सीएचसी को 50 बेड के सिविल अस्पतालों में बदलना।
-07 सीएचसी व सिविल अस्पतालों को 100 बेड के सिविल अस्पतालों में बदलना।
-73 अपग्रेड होने वाले इन अस्पतालों में 1550 से अधिक नियमित पदों को मिलनी थी स्वीकृति।
-445 से अधिक आउटसोर्स कर्मियों के लिए स्वीकृति होने थे नए पद