
Indian Railways : ट्रेनों के एसी कोच में होने वाली चोरी अब सिर्फ यात्री की किस्मत या सुरक्षा व्यवस्था की चूक मानकर नहीं छोड़ी जाएगी। रेल मुख्यालय ने सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि, एसी कोच में चोरी होने पर संबंधित अटेंडर को भी अनिवार्य रूप से आरोपी बनाया जाएगा। इसके पीछे रेल पुलिस मुख्यालय का तर्क है कि, अटेंडर की जिम्मेदारी पूरे कोच की निगरानी और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसे में उसके ड्यूटी पर रहते चोरी होना अपने आप में उसकी भूमिका की जांच का आधार बनेगा।
बता दें कि, एसी कोच में पिछले कई दिनों से लगातार सामने आ रही चोरी की घटनाएं और कुछ मामलों में अटेंडरों की संदिग्ध भूमिका के बाद रेलवे पुलिस मुख्यालय की ओर से अब इस मामले में लगाम लगाने की तैयारी की जा रही है।
रेलवे पुलिस मुख्यालय ने जांच में पाया कि एसी कोच में वारदातें तेजी से बढ़ीं हैं। जीआरपी थाना विदिशा में 3 साल साल में 116 मामले सामने आए। इनमें अधिकांश चोरी की वारदातें एसी कोच में हुईं, जबकि स्लीपर व जनरल कोच में कम रहीं। वहीं ग्वालियर जीआरपी क्षेत्र में 2022 में एसी कोच में 109, 2023 में 129 और 2024 में 334 चोरी हुईं। यानी दो साल में मामले तीन गुना बढ़ गए।
इसी साल फरवरी में रेलवे नेटवर्क के जरिए हो रही वन्यजीव तस्करी का एक बड़ा पर्दाफाश हुआ था। जिसमें एक ट्रेन कोच अटेंडेट को मुख्य आरोपी पाया गया था। आरोपी के पास से दो बैगों में छिपाकर रखे गए 311 जीवित दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए बरामद किए गए थे। इसके अलावा सामान चोरी के कई प्रकरणों में भी अटेंडरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
डीजी रेल राजाबाबू सिंह का कहना है कि, ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा जीआरपी की पहली प्राथमिकता है। ऐसे में एसी कोच में अगर अब चोरी होती है तो उसमें अटेंडर को आरोपी बनाया जाएगा। बढ़ते मामलों में अटेंडरों की भूमिका जांचना आवश्यक है।