
UCC in MP: विधान सभा के इसी सत्र में सरकार कई समसामयिक विषयों को लेकर आएगी। इनमें कॉमन सिविल कोर्ट (UCC) की तरफ भी हम बढ़ रहे हैं। महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में पारित होगा। बुधवार को प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए यह घोषणा कर दी है।
बता दें कि यहां सरकार अगले विधानसभा सत्र यानी मानसून सत्र (MP Assembly Monsoon Session 2026) की बात कर रही है। यह सत्र 20 जून से शुरू होना है। यानी प्रदेश की मोहन सरकार पूरी तैयारी में है कि विधान सभा के मानसून सत्र 2026 में UCC बिल पेश कर इसे पारित भी कर दिया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी कहा है कि अगले विधानसभा सत्र में UCC ही नहीं प्रदेश सरकार कई समसामयिक विषयों को लेकर आ रही है। जिनमें UCC (UCC in MP) सबसे महत्वपूर्ण विधेयकों में से एक है। सरकार का मानना है कि नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति संबंधी मामलों में समान कानूनी व्याख्या सुनिश्चित होगी।
बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने UCC के मसौदे (UCC Bill Presented in MP Assembly )और विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की समिति का गठन किया था। इस समिति ने विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से सुझाव लेने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। अब प्रदेश की मोहन यादव सरकार इसी रिपोर्ट के आधार पर विधेयक को विधानसभा में पेश करने की तैयारी कर रही है।
बता दें कि प्रदेश में UCC को लागू (UCC Implemented Soon) करने की चर्चा पिछले कुछ महीनों से चल रही है। प्रदेश सरकार इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। इसके विपरीत विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा और सभी पक्षों की सहमति की आवश्यकता बता रहे हैं।
सबकुछ सरकार की योजना के साथ आगे बढ़ा तो इसी विधानसभा सत्र में मध्य प्रदेश (UCC Bill in MP) में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो जाएगा। इसके बाद UCC को लागू करने वाले राज्यों में उत्तराखंड, गुजरात, गोवा, असम के बाद मध्यप्रदेश पांचवा राज्य बन जाएगा।
UCC के लागू करने की घोषणा (UCC Bill Major Announcement by CM Mohan Yadav) के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर आ टिकी हैं कि मध्य प्रदेश सरकार के UCC बिल में क्या-क्या प्रावधान होंगे। यही प्रश्न इस UCC बिल को खास बनाने वाला है। तो विधान सभा सत्र में UCC पर राजनीतिक दलों और प्रदेशवासियों के लिए महत्वपूर्ण होने वाली है।