भोपाल

’28 साल सेवा के बाद पात्रता पर सवाल क्यों?’ शिक्षक TET विवाद पर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल

TET Exam : उमंग सिंघार ने पूछा- भाजपा सरकार बताए, 28 साल की सेवा के बाद भी शिक्षक की योग्यता पर सवाल क्यों? उनकी पहली नियुक्ति से वरिष्ठता और सेवा लाभ क्यों नहीं?
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TET Exam
उमंग सिंघार ने उठाए सवाल (फोटो सोर्स: Umang Singhar Facebook)

Bhopal News :मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर शिक्षकों का विरोध जारी है। इसी बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, साथ ही शिक्षकों की मांगों पर सरकार से तुरंत विचार करने की अपील भी की है। सिंघार ने कहा कि, जो शिक्षक पिछले 28 साल से बच्चों का भविष्य संवारने का काम रहे हैं, अब उन्हीं से उनकी पात्रता साबित करने के लिए परीक्षा ली जा रही है।

उमंग सिंघार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रदेश सरकार के समक्ष सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, मध्य प्रदेश में साल 1998 से सेवा दे रहे शिक्षक आज अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि, इन शिक्षकों की 20 साल की वरिष्ठता साल 2018 में समाप्त कर दी गई, जिसका असर अब उनकी ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर पड़ रहा है।

सरकार को देना चाहिए जवाब- सिंघार

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से सवाल किया कि, सालों तक शिक्षकों की सेवाएं लेने के बाद उम्र के इस पड़ाव पर उनसे दोबारा पात्रता साबित करने के लिए परीक्षा क्यों ली जा रही है। उन्होंने ये भी कहा कि, 28 साल की सेवा के बाद भी अगर शिक्षक की योग्यता पर सवाल उठाया जा रहा है तो खुद सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

शिक्षकों की मांगों पर विचार करने की अपील

सिंघार ने कहा कि, शिक्षकों को उनकी पहली नियुक्ति से वरिष्ठता और सेवा लाभ क्यों नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शिक्षकों की मांगों पर विचार करने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि, शिक्षकों का सम्मान सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि उनके अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा तय करने से होना चाहिए। उन्होंने सरकार से शिक्षक पात्रता परीक्षा समेत वरिष्ठता, पेंशन और अन्य सेवा लाभों से जुड़े मुद्दों पर समाधान निकालने की भी मांग की है।

प्रदर्शन कर रहे शिक्षक

वहीं, प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों का कहना है कि, उन्होंने डीएड और बीएड जैसी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने और उसके आधार पर नियुक्ति पाई है। ऐसे में सालों की सेवा के बाद फिर से पात्रता परीक्षा लेना ठीक नहीं है। अध्यापक संघर्ष समिति के पदाधिकारी भारत भार्गव ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि, कई शिक्षक 20 से 28 साल तक सेवा कर चुके हैं। ऐसे में दादा-दादी और नाना-नानी की उम्र में दोबारा परीक्षा कराना शिक्षकों के साथ अन्याय है। सरकार के इस फैसले से उनमें नाराजगी है। भार्गव ने ये भी कहा कि, उनकी नियुक्ति 1998 में हुई थी और करीब 28 साल की सेवा के बाद सरकारी पोर्टल पर उनकी सेवा अवधि सिर्फ 8 साल ही दिख रही है।

Updated on:
05 Oct 2026 08:17 pm
Published on:
05 Oct 2026 06:50 pm