बिजनोर

Bijnor News: जिंदा जल गए 7 बेजुबान, चीखता रहा पूरा गांव; सोता रहा फायर ब्रिगेड और प्रशासन!

Bijnor News: बिजनौर जिले के गांव टांडा सिक्कावाला में पशुशाला में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।
2 min read
Feb 22, 2026
bijnor fire livestock death administration negligence
Bijnor News: जिंदा जल गए 7 बेजुबान..

Fire livestock death Bijnor: एक न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर स्थित बढ़ापुर क्षेत्र से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहां के गांव टांडा सिक्कावाला में शनिवार की शाम एक घर की खुशियां और मेहनत की कमाई आग की लपटों में विलीन हो गई।

शनिवार शाम करीब 4:20 बजे बलराज पुत्र सुक्खन सिंह की निजी पशुशाला में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते एक मामूली सी चिंगारी ने विकराल रूप धारण कर लिया। इस भयावह मंजर के बीच सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जब ग्रामीण मदद के लिए प्रशासन और दमकल विभाग को गुहार लगा रहे थे, तब दूसरी ओर से सिर्फ सन्नाटा मिला।

बेजुबानों की चीख और लाचार ग्रामीण

आग इतनी तेजी से फैली कि पशुशाला में बंधे पशुओं को संभलने तक का मौका नहीं मिला। आग की लपटों के बीच घिरे 7 बेजुबान जानवर (जिनमें भैंस, कटिया और बकरी शामिल थे) जान बचाने के लिए छटपटाते रहे, लेकिन खूंटे से बंधे होने के कारण वे मौत के मुंह में समा गए।

ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए आनन-फानन में गांव के नलों से बाल्टियां भर-भर कर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग का तांडव इतना भीषण था कि इंसानी कोशिशें बौनी साबित हुईं। देखते ही देखते बलराज की आंखों के सामने उसकी पूरी आजीविका जलकर खाक हो गई।

फोन बजता रहा

इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन की आपातकालीन सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के दौरान उन्होंने लगातार फायर ब्रिगेड और एसडीएम नगीना को फोन मिलाया। कॉल पर कॉल की गई, लेकिन न तो दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची और न ही किसी अधिकारी ने फोन उठाना मुनासिब समझा।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते दमकल विभाग हरकत में आ जाता, तो शायद इन मासूम बेजुबानों की जान बचाई जा सकती थी। तहसील प्रशासन की इस बेरुखी को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है।

आर्थिक तबाही और मुआवजे की मांग

इस भीषण अग्निकांड में केवल जान का ही नुकसान नहीं हुआ, बल्कि पीड़ित परिवार आर्थिक रूप से भी सड़क पर आ गया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, सात पशुओं के साथ-साथ पशुशाला में रखा करीब डेढ़ लाख रुपये का सामान जलकर राख हो गया है।

पीड़ित बलराज के लिए यह सिर्फ एक आगजनी नहीं, बल्कि उसके भविष्य पर लगा एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब ग्रामीण और पीड़ित परिवार सरकार से उचित मुआवजे और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी संवेदनहीनता दोबारा न दोहराई जाए।

Updated on:
22 Feb 2026 11:33 am
Published on:
22 Feb 2026 11:33 am