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दुष्कर्म मामले में 11 साल बाद मिला इंसाफ: बिजनौर कोर्ट ने जगराम सिंह को 20 साल की कठोर सजा सुनाई

Bijnor Crime: बिजनौर में दुष्कर्म के एक मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय व फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी जगराम सिंह को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

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Jan 13, 2026
दुष्कर्म मामले में 11 साल बाद मिला इंसाफ | Image Source - Pexels

Bijnor rape case 20 years jail:यूपी के बिजनौर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में आरोपी जगराम सिंह को दोषी ठहराते हुए कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधीश अशोक भारतेंदु ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने यह सजा महिला के साथ हुए जघन्य अपराध को गंभीर मानते हुए दी है।

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अभियोजन पक्ष की दलीलें

अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मुकुल कुमार चौहान ने बताया कि यह मामला कोर्ट के आदेश पर थाना कोतवाली शहर में दर्ज कराया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष पीड़िता की शिकायत, मेडिकल साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए, जिनके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया।

उधार के पैसे से जुड़ा विवाद

मामले के अनुसार, पीड़िता के पति ने घटना से लगभग छह माह पूर्व आरोपी जगराम सिंह को 20 हजार रुपये उधार दिए थे। आरोपी ने एक महीने के भीतर रकम लौटाने का आश्वासन दिया था, लेकिन लंबे समय तक पैसे वापस नहीं किए गए, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद बना हुआ था।

बस स्टैंड से अपहरण का आरोप

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि 26 सितंबर 2014 को वह बिजनौर रोडवेज बस स्टैंड पर उतरी थी। उसी दौरान आरोपी जगराम सिंह अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा और जबरन उसे एक वैन में बैठाकर ले गया। पीड़िता के अनुसार, इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसला

घटना के बाद से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के अपराधों में कठोर सजा समाज में एक सशक्त संदेश देने के लिए आवश्यक है।

पीड़िता को न्याय का भरोसा

फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस फैसले को महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है। लंबे समय बाद आए इस निर्णय से पीड़िता को न्याय मिला है और ऐसे मामलों में त्वरित व सख्त कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।

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