Bijnor News: बिजनौर में विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए 3,847 विस्थापित परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। दशकों से जिस जमीन पर ये परिवार खेती और निवास कर रहे थे, अब उन्हें उसी भूमि का स्थायी मालिकाना हक मिलने जा रहा है।
Refugee Land Ownership UP: यूपी के बिजनौर जिले में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए 3,847 विस्थापित परिवारों को अब उनकी जमीन का स्थायी मालिकाना हक मिलने जा रहा है। यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो दशकों से इस जमीन पर रहकर खेती-किसानी कर रहे थे, लेकिन उनके पास कोई कानूनी स्वामित्व नहीं था। इस मुद्दे को बढ़ापुर विधायक सुशांत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाया था, जिसके बाद इस पर गंभीरता से कार्रवाई शुरू हुई।
विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए इन परिवारों को धामपुर और नगीना तहसील क्षेत्र के 17 गांवों में बसाया गया था। इन परिवारों ने यहां जंगल और झाड़ियों से घिरी जमीन को साफ कर खेती योग्य बनाया और अपने घर भी बनाए। वर्षों की मेहनत के बावजूद इन्हें जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल पाया था, जिससे ये परिवार कानूनी रूप से असुरक्षित स्थिति में रह रहे थे।
करीब छह माह पहले लखनऊ से आए राजस्व विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने इस मामले की गहन समीक्षा की थी। टीम ने स्थानीय प्रशासन को जमीन और परिवारों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए थे। दोबारा हुई जांच में 3,847 परिवारों की पुष्टि हुई, जिसके बाद अब इन्हें भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विस्थापित परिवारों को जमीन देने के लिए 651 हेक्टेयर से अधिक भूमि का चयन किया गया है। इसके साथ ही भूमि आवंटन के लिए गजट भी जारी कर दिया गया है। यह फैसला उन परिवारों के लिए ऐतिहासिक साबित होगा, जो 1947 के बाद से लगातार इस जमीन पर खेती कर रहे थे, लेकिन उनके पास कोई वैधानिक अधिकार नहीं था।
बढ़ापुर विधायक सुशांत सिंह ने करीब एक वर्ष पहले इस मुद्दे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजस्व विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और विस्थापित परिवारों की समस्याएं सुनीं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर शासन ने कार्रवाई करते हुए राज्यपाल से गजट जारी कराया।
धामपुर तहसील के रसूलाबाद, नवाबपुर, छजमलवाला, तुरतपुर, मीरापुर मोदीवाला, अजीमुल्लानगर, आवली, कल्लूवाला, गुलरवाली, इस्लामनगर और फतेहपुर गांवों में 1,332 परिवार रहते हैं। वहीं नगीना तहसील के कुआंखेड़ा, मदपुरी, चंपतपुर चकला और प्रेमपुरी गांवों में 2,515 परिवार निवास कर रहे हैं। ये सभी परिवार पिछले करीब 70 वर्षों से यहां रह रहे हैं।
एडीएम प्रशासन अंशिका दीक्षित के अनुसार, राज्यपाल द्वारा गजट जारी किए जाने के बाद अब जमीन आवंटन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। जैसे ही शासन से विस्तृत गाइडलाइन प्राप्त होगी, वैसे ही इन परिवारों को जमीन का मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।