
बीकानेर शहर में बिजली व्यवस्था की कथित लापरवाही ने एक परिवार का इकलौता सहारा छीन लिया। नत्थूसर गेट निवासी 24 साल के आनंद उर्फ राहुल ओझा की टूटे हुए बिजली के तार की चपेट में आने से मौत हो गई। आनंद अपने पिता की पान की दुकान में पिछले 8 सालों से हाथ बंटाकर परिवार का सहारा बना हुआ था। उसकी असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शुक्रवार सुबह नत्थूसर गेट के बाहर स्थित चतोलाई श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
गुरुवार सुबह आनंद अपने नत्थूसर गेट स्थित घर से बिन्नाणी चौक में रहने वाली बुआ के घर गया था। वहां से उसे अपने मौसेरे भाई किशन को रेलवे स्टेशन छोड़ने जाना था। घर से बाहर निकलते समय उसने बाहर पड़े हुए टूटे बिजली के तार को हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान वह करंट की चपेट में आ गया। बुआ, फूफा और किशन ने प्लास्टिक के पाइप की मदद से उसे बचाने की भरसक कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में तार टूटकर अलग हुआ तो उसे तत्काल पीबीएम अस्पताल पहुंचाया गया जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आनंद उर्फ राहुल परिवार का इकलौता बेटा था। उससे बड़ी एक बहन प्रियंका है। पिता महेश कुमार ओझा बीकानेर में नत्थूसर गेट के पास पान की दुकान चलाते हैं। परिवार का पैतृक मकान रत्ताणी व्यास चौक में है।
परिजनों के अनुसार आनंद स्वभाव से बेहद मृदुभाषी और मिलनसार था। पिछले करीब आठ वर्षों से वह पिता के साथ दुकान संभाल रहा था और परिवार की जिम्मेदारियों में बराबर का भागीदार था। साथ ही बीए अंतिम वर्ष की पढ़ाई भी कर रहा था।
इकलौते भाई की मौत का सदमा बड़ी बहन प्रियंका सहन नहीं कर पा रही है। वह बार-बार भाई को याद कर फूट-फूटकर रो पड़ती है और कई बार बेहोश हो गई। उसकी बिगड़ती मानसिक स्थिति को देखते हुए परिजन उसे उसकी मौसी के घर ले गए हैं।
मृतक के ताऊ के बेटे चन्द्रशेखर उर्फ चंदू ओझा ने आरोप लगाया कि लापरवाही ने आनंद की जान ले ली। उन्होंने कहा, 'हम बस इतना चाहते हैं कि जो हमारे परिवार के साथ हुआ, वह किसी और परिवार के साथ नहीं हो। प्रशासन खुले पड़े और टूटे बिजली के तारों को तत्काल दुरुस्त करवाए, ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।'
हादसे के बाद क्षेत्रवासियों में भी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में बिजली के जर्जर और खुले तार लंबे समय से हादसों को न्योता दे रहे हैं। समय रहते इन्हें दुरुस्त नहीं किया गया तो भविष्य में भी ऐसे हादसे हो सकते हैं।