21 सितंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Bikaner New Mayor: कौन हैं अनिल कल्ला, जो बन गए बीकानेर के 5वें महापौर, जानिए पूरा प्रोफ़ाइल

अनिल कल्ला ने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करते हुए 50 वोटों के साथ एकतरफा व मजबूत जीत दर्ज की है।
3 min read
Google source verification
Bikaner New Mayor Anil Kalla Full Profile

Bikaner New Mayor Anil Kalla Full Profile

बीकानेर नगर निगम के नए महापौर (मेयर) कांग्रेस पार्टी के अनिल कल्ला बने हैं। आज, 21 सितंबर को हुए मतदान और उसके तुरंत बाद हुई मतगणना के बाद आधिकारिक नतीजे सामने आ गए हैं। इस मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला को कुल 50 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट प्राप्त हुए।

80 सदस्यीय बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के पास खुद के 42 पार्षद थे (बहुमत के लिए 41 चाहिए थे). लेकिन अनिल कल्ला ने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करते हुए 50 वोटों के साथ एकतरफा व मजबूत जीत दर्ज की है। वे पूर्व कद्दावर मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे हैं और बीकानेर नगर निगम के पांचवें महापौर चुने गए हैं।

कौन हैं बीकानेर के नए मेयर अनिल कल्ला?

अनिल कल्ला बीकानेर नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर (मेयर) हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के एक वरिष्ठ और जमीनी राजनेता हैं। 21 सितंबर 2026 को हुए नगरीय निकाय चुनाव में उन्होंने भाजपा के सुरेन्द्र सिंह शेखावत को 50 बनाम 30 वोटों के बड़े अंतर से हराकर बीकानेर के पांचवें महापौर के रूप में कमान संभाली है।

अनिल कल्ला हाल ही में संपन्न हुए बीकानेर नगर निगम चुनाव 2026 में वार्ड नंबर 73 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी दीपक पारीक को हराकर यह चुनाव जीता था।

वे वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) बीकानेर के महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

वे पिछले 33 वर्षों से अधिक समय से कांग्रेस पार्टी में एक सक्रिय और वफादार कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं। बीकानेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए भी पूर्व में दो बार उनका नाम प्रमुखता से चर्चा में आ चुका है।

वे बीकानेर के प्रसिद्ध 'राजीव यूथ क्लब' के अध्यक्ष भी हैं, जिसके माध्यम से वे लगातार बीकानेर में सामाजिक, सांस्कृतिक और युवा कल्याण से जुड़ी गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं।

वे कैंसर पीड़ितों की मदद करने वाली जानी-मानी संस्था के साथ बतौर वॉलंटियर जुड़े हुए हैं और बीकानेर के अस्पतालों में मरीजों के मार्गदर्शन तथा सहायता के लिए सक्रिय रहते हैं।

अपनी इसी साफ-सुथरी छवि, लंबे राजनीतिक अनुभव और मजबूत पारिवारिक पकड़ के कारण वे बीकानेर में कांग्रेस के पार्षदों और निर्दलीयों को एकजुट कर शहर के नए मुखिया बनने में कामयाब रहे।

80 सदस्यों वाले बीकानेर नगर निगम के सदन में इस बार का मुकाबला सिर्फ वोटों की गिनती तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह राजनीतिक कौशल, विधायकों के रणनीति प्रबंधन और बाड़ाबंदी के कड़े पहरे की परीक्षा भी थी। पार्षदों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) और विरोधी गुट की ओर से की जाने वाली संभावित सेंधमारी से बचाने के लिए दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों और नवनिर्वाचित पार्षदों की कड़ी बाड़ाबंदी कर रखी थी।

बीकानेर को मिला5वां महापौर: जानिए अब तक का रिकॉर्ड

बीकानेर को वर्ष 2008 में नगर परिषद से अपग्रेड करके नगर निगम का दर्जा दिया गया था। इसके बाद से अब तक शहर को 4 महापौर मिल चुके हैं:

  1. मकसूद अहमद (2008): तत्कालीन सभापति, जिन्हें नगर निगम बनने पर पहला महापौर बनने का गौरव प्राप्त हुआ।
  2. भवानी शंकर शर्मा (2009): कांग्रेस पार्टी से बीकानेर के दूसरे महापौर चुने गए।
  3. नारायण चोपड़ा (2014): भारतीय जनता पार्टी से तीसरे महापौर बने।
  4. सुशीला कंवर राजपुरोहित (2019): भाजपा की ओर से चौथी महापौर निर्वाचित हुईं।

अब तक के इतिहास में दो बार कांग्रेस (मकसूद अहमद व भवानी शंकर शर्मा) और दो बार बीजेपी (नारायण चोपड़ा व सुशीला कंवर) के महापौर सत्ता संभाल चुके हैं। आज के नतीजों के बाद बीकानेर के इतिहास में किसी एक दल के महापौरों की संख्या बढ़कर 3 हो जाएगी।

32 साल का चुनावी इतिहास: 17 साल बाद कांग्रेस ने बनाई स्पष्ट बढ़त

बीकानेर के नगरीय निकाय चुनावों के पिछले 32 वर्षों (1994 से 2026) के इतिहास को देखें तो कुल 7 निकाय चुनावों में 445 पार्षद चुनकर सदन पहुंचे हैं। इनमें बीजेपी के 198 और कांग्रेस के 165 पार्षद रहे हैं। कुल मिलाकर बीजेपी का दबदबा रहा।

लेकिन 2026 के इस चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर 17 साल बाद (वर्ष 2009 के बाद) बीजेपी पर इतनी बड़ी और स्पष्ट बढ़त बनाई है। इससे पहले 2009 में 60 वार्डों में से कांग्रेस ने 34 सीटें जीती थीं। 32 सालों में बीकानेर सदन का आकार 55 वार्डों से बढ़कर 80 वार्डों तक पहुंच गया।

बाड़ाबंदी से सीधे म्यूनिसिपल सभागार पहुंचे पार्षद

बीकानेर नगर निगम चुनाव के परिणाम आने के तुरंत बाद से ही बीजेपी और कांग्रेस ने अपने-अपने समर्थक पार्षदों को शहर से दूर सुरक्षा घेरे में भेज दिया था।

कांग्रेस का खेमा: कांग्रेस के 42 पार्षद और उनके समर्थक पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के लग्जरी रिजॉर्ट्स में ठहरे हुए थे।

बीजेपी का खेमा: वहीं, भारतीय जनता पार्टी के 27 पार्षद जोधपुर के रिजॉर्ट में बाड़ाबंदी में रहे।

कड़ी सुरक्षा में वोटिंग: सोमवार सुबह दोनों दलों की बसें कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच सीधे मतदान केंद्र यानी गांधी म्यूनिसिपल सभागार पहुंचीं। वोट डालने के बाद पार्षदों को मतगणना प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षा घेरे में ही रखा जाएगा।