
BJP Pankaj Gehlot - File PIC
राजस्थान के बीकानेर नगर निगम में उप-महापौर चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नया ट्विस्ट खड़ा कर दिया है। 80 सदस्यीय बोर्ड में केवल 27 पार्षदों का संख्याबल होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी पंकज गहलोत ने शानदार जीत हासिल करते हुए बीकानेर के नए उप-महापौर की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। पंकज गहलोटी को जहां कुल 40 वोट मिले, वहीं प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी नसीम बानो को 38 वोट मिले। इस तरह से पंकज गहलोत ने मुकाबला 2 वोट के अंतर से जीत लिया।
इस जीत के साथ ही कांग्रेस पार्टी का उप-महापौर बनाने का मास्टरप्लान पूरी तरह ध्वस्त हो गया। कांग्रेस ने अधिकृत रूप से वार्ड 66 की पार्षद नसीम बानो को मैदान में उतारा था और अपने अन्य बागी प्रत्याशियों के फॉर्म वापस भी करवा लिए थे, लेकिन वे अपने कुनबे को एकजुट रखने में नाकाम रहे। वहीं, मतदान की प्रक्रिया के दौरान नगर निगम परिसर में पुलिस-प्रशासन, कांग्रेस नेताओं और भाजपा विधायक जेठानंद व्यास के बीच भारी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और तीखा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला।
बीकानेर नगर निगम में महापौर की कुर्सी कांग्रेस के खाते में जाने के बाद भाजपा ने उप-महापौर चुनाव में रणनीतिक बिसात बिछाई थी। पार्टी ने वार्ड 51 से पार्षद पंकज गहलोत को अपना उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस के पास संख्याबल ज्यादा होने के बावजूद मतदान के बाद जब नतीजे आए तो पंकज गहलोत विजेता घोषित किए गए। भाजपा नेताओं ने इस जीत को कार्यकर्ताओं की मेहनत और कांग्रेस के अंदरूनी असंतोष का नतीजा बताया है।
उप-महापौर चुनाव में कांग्रेस की रणनीति पूरी तरह फेल साबित हुई। कांग्रेस के पूर्व शहर अध्यक्ष यशपाल गहलोत बागी होकर नामांकन भरने वाले पार्षदों को साथ लेकर निगम पहुंचे थे और अधिकृत प्रत्याशी नसीम बानो के समर्थन में 5 अन्य प्रत्याशियों के नाम वापस भी करवाए गए थे। पूर्व मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला की मौजूदगी में सभी को एकजुट करने का प्रयास किया गया था, लेकिन गुप्त मतदान के दौरान हुई क्रॉस-वोटिंग ने कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
मतदान प्रक्रिया के दौरान नगर निगम परिसर में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष यशपाल गहलोत एक पार्षद का एंट्री कार्ड देने अंदर जाने लगे। मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने उन्हें मुख्य द्वार पर रोक दिया, जिससे तीखी कहासुनी हो गई। बहस बढ़ने पर पुलिसकर्मियों ने यशपाल गहलोत को परिसर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस दौरान पूर्व मंत्री बी. डी. कल्ला ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के सख्त रवैये के कारण परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा।
इसी हंगामे के बीच भाजपा विधायक जेठानंद व्यास भी नगर निगम पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उनकी गाड़ी को मुख्य गेट पर रोक दिया। इस पर विधायक जेठानंद व्यास बुरी तरह भड़क गए। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि "बीकानेर में कांग्रेस का मेयर बनते ही प्रशासनिक तानाशाही शुरू हो गई है। जब मेरी गाड़ी को बाहर रोका जा सकता है तो आम जनता का क्या होगा?" विधायक ने पुलिस अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए निष्पक्षता से काम करने की सख्त हिदायत दी।
इस चुनाव परिणाम के बाद बीकानेर नगर निगम में एक बेहद दिलचस्प राजनीतिक समीकरण बन गया है। अब बीकानेर में मेयर कांग्रेस पार्टी का है, जबकि डिप्टी मेयर भाजपा के पंकज गहलोत बन चुके हैं। शहर के विकास कार्यों और आगामी बोर्ड बैठकों में दो अलग-अलग विचारधाराओं वाले जन प्रतिनिधियों के बीच तालमेल बैठाना एक बड़ी चुनौती होगा। स्थानीय राजनीति के जानकारों का कहना है कि बीकानेर की जनता को अब नगर निगम में कड़ा मुकाबला और खींचतान देखने को मिलेगी।
Updated on:
22 Sept 2026 04:43 pm
Published on:
22 Sept 2026 04:43 pm
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