बीकानेर

EWS Reservation : देशभर में लागू हो राजस्थान का ‘ईडब्ल्यूएस मॉडल’, PM मोदी से मांगा मिलने का समय 

ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण की विसंगतियों को लेकर अब एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है और प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का समय भी मांगा गया है।

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May 01, 2026
EWS Reservation matter
EWS Reservation matter

राजस्थान की राजनीति में अब 'हक' और 'हिस्सेदारी' की लड़ाई सात समंदर पार नहीं, बल्कि दिल्ली के गलियारों तक पहुँचने वाली है। आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EWS) के लिए जन जागृति अभियान चला रहे आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ ने बीकानेर के सर्किट हाउस में एक बड़ी हुंकार भरी है। राठौड़ का दावा है कि केंद्र सरकार के जटिल नियमों के कारण ईडब्ल्यूएस वर्ग के लाखों युवा केंद्रीय नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग की है कि राजस्थान में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किए गए 'सरल ईडब्ल्यूएस मॉडल' को पूरे देश में लागू किया जाए।

क्या है EWS का 'राजस्थान मॉडल'?

धर्मेंद्र राठौड़ ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार के नियमों में जमीन-आसमान का अंतर है:

  • केंद्र की कठिन शर्तें: मोदी सरकार ने 2019 में 10% आरक्षण तो दिया, लेकिन साथ में 5 एकड़ भूमि, शहरी क्षेत्रों में 100 वर्ग गज का भूखंड और 1000 वर्ग फीट के फ्लैट जैसी शर्तें लगा दीं। इन शर्तों की वजह से मध्यम वर्ग का व्यक्ति भी आरक्षण की श्रेणी से बाहर हो जाता है।
  • राजस्थान की राहत: राजस्थान की पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने 20 अक्टूबर 2019 को एक क्रांतिकारी फैसला लिया। सरकार ने ₹8 लाख की आय सीमा को बरकरार रखा, लेकिन संपत्ति संबंधी सभी चारों शर्तों (जमीन, मकान, फ्लैट) को पूरी तरह हटा दिया।
  • आयु और वैधता में छूट: राजस्थान में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता 1 साल से बढ़ाकर 3 साल की गई और पुरुष अभ्यर्थियों को 5 वर्ष व महिलाओं को 10 वर्ष की आयु सीमा में छूट दी गई।

'केंद्रीय नौकरियों में राजस्थान के युवाओं को नुकसान'

धर्मेंद्र राठौड़ का कहना है कि जब राजस्थान का युवा राज्य सरकार की नौकरियों के लिए आवेदन करता है, तो उसे आसानी से आरक्षण मिल जाता है। लेकिन जैसे ही वह एसएससी (SSC), यूपीएससी (UPSC) या रेलवे जैसी केंद्रीय भर्तियों में जाता है, केंद्र की 'संपत्ति संबंधी शर्तों' के कारण वह अपात्र हो जाता है। यह विसंगति राजस्थान के युवाओं के साथ अन्याय है।

प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की तैयारी, एकजुट हो रहा विपक्ष

इस अभियान को धार देने के लिए धर्मेंद्र राठौड़ राजस्थान के विभिन्न जिलों जैसे अलवर, अजमेर, जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर का दौरा कर चुके हैं।

  1. पीएम से समय की मांग: ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने का समय मांगा गया है ताकि उन्हें इस विसंगति से अवगत कराया जा सके।
  2. सर्वदलीय समर्थन: राठौड़ ने साफ किया कि यह केवल कांग्रेस की लड़ाई नहीं है। वे अन्य राजनीतिक विचारधाराओं वाले नेताओं और सामाजिक संगठनों को भी इस मंच से जोड़ रहे हैं। बीकानेर की प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री भंवरसिंह भाटी और कैशकला बोर्ड के पूर्व चेयरमैन महेंद्र गहलोत की मौजूदगी ने इस अभियान की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

'सस्पेंस': क्या बदलेगा केंद्र का रुख?

इस अभियान ने राजस्थान भाजपा के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है। यदि केंद्र सरकार इन शर्तों को नहीं हटाती है, तो आगामी चुनावों में कांग्रेस इसे एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। सवर्ण समाज के बीच यह संदेश जा रहा है कि राजस्थान मॉडल उन्हें अधिक सुरक्षा और अवसर प्रदान करता है।

Published on:
01 May 2026 02:30 pm