ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण की विसंगतियों को लेकर अब एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है और प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का समय भी मांगा गया है।
राजस्थान की राजनीति में अब 'हक' और 'हिस्सेदारी' की लड़ाई सात समंदर पार नहीं, बल्कि दिल्ली के गलियारों तक पहुँचने वाली है। आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EWS) के लिए जन जागृति अभियान चला रहे आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ ने बीकानेर के सर्किट हाउस में एक बड़ी हुंकार भरी है। राठौड़ का दावा है कि केंद्र सरकार के जटिल नियमों के कारण ईडब्ल्यूएस वर्ग के लाखों युवा केंद्रीय नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग की है कि राजस्थान में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किए गए 'सरल ईडब्ल्यूएस मॉडल' को पूरे देश में लागू किया जाए।
धर्मेंद्र राठौड़ ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार के नियमों में जमीन-आसमान का अंतर है:
धर्मेंद्र राठौड़ का कहना है कि जब राजस्थान का युवा राज्य सरकार की नौकरियों के लिए आवेदन करता है, तो उसे आसानी से आरक्षण मिल जाता है। लेकिन जैसे ही वह एसएससी (SSC), यूपीएससी (UPSC) या रेलवे जैसी केंद्रीय भर्तियों में जाता है, केंद्र की 'संपत्ति संबंधी शर्तों' के कारण वह अपात्र हो जाता है। यह विसंगति राजस्थान के युवाओं के साथ अन्याय है।
इस अभियान को धार देने के लिए धर्मेंद्र राठौड़ राजस्थान के विभिन्न जिलों जैसे अलवर, अजमेर, जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर का दौरा कर चुके हैं।
इस अभियान ने राजस्थान भाजपा के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है। यदि केंद्र सरकार इन शर्तों को नहीं हटाती है, तो आगामी चुनावों में कांग्रेस इसे एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। सवर्ण समाज के बीच यह संदेश जा रहा है कि राजस्थान मॉडल उन्हें अधिक सुरक्षा और अवसर प्रदान करता है।