बीकानेर

‘ईसर जी रे हाथ रो रूमाल, गवरा बाई रै ओढ़ण रो दुपट्टो’

घर-घर और गली-मोहल्लों में गूंज रहे गणगौर के पारम्परिक गीत

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Apr 03, 2021
‘ईसर जी रे हाथ रो रूमाल, गवरा बाई रै ओढ़ण रो दुपट्टो’

बीकानेर. ‘गढन हे कोटो सूं गवरल उतरी’, ‘खेलण दो गणगौर’ और ‘ईसर जी रै हाथ रो रूमाल, गवरा बाई रै ओढण रो दुपट्टो’ सरीखे गणगौर गीत घर-घर और गली -मोहल्लों में गूंज रहे है। धुलंडी से शुरू हुए गणगौर पूजन उत्सव में बालिकाएं मां गवरजा का पूजन कर अच्छा वर एवं अच्छा घर की कामना कर रही है।

अलसुबह घरों की छतों पर सामुहिक रूप से बालिकाएं मिट्टी के पालसिए में मां गवरजा का पूजन करने के दौरान पारम्परिक गणगौरी गीतों का गायन कर रही है। वहीं पुरुषों की मंडलियों की ओर से भी गणगौर के गीत गाए जा रहे है। शीतला अष्टमी से दांतणिया और घुड़ले के पारम्परिक गीतों का गायन शुरू होगा। मां गवरजा का बासा देने के दौरान बालिकाएं और महिलाएं घर-घर गली मोहल्लों में मां गवरजा की प्रतिमाओं के समक्ष विविध पकवानों का भोग अर्पित कर गणगौरी गीतों का गायन कर नृत्य प्रस्तुत करेंगी।

‘नूवी हवेली में पौढ़े गवरजा, खसखस का पंखा’
बालिकाएं बाला गणगौर पूजन के दौरान पारम्परिक गीतों के गायन के साथ-साथ ‘ऐ तो आठ कुआं रो नव बावड़ी रे लाल’, ‘बारह बरस रा ईसर जी रे लाल, तेरह बरसो री गवरल गोरी’,‘ईसर दास जी रा सुआ रे’, ‘ईंट तपे चकलो तपे, रूणझुणियो ले’, ‘पागडल्यों रा पेच ईसर जी ढीला ढीला लागै’, ‘थोरा वचन हे सुहावणा रे धणरा हो राज’ आदि पारम्परिक गणगौरी गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। बालिकाएं घर परिवार की बड़ी -बुजुर्ग महिलाओं के सानिध्य में गणगौर गीतों का गायन कर रही है।

मथैरण चौक ने लिया गणगौर बाजार का रूप
गणगौर पर्व के आगाज के साथ ही गणगौर प्रतिमाओं को सजाने-संवारने का कार्य शुरू हो गया है। भुजिया बाजार क्षेत्र स्थित मथैरण चौक ने गणगौर बाजार का रूप ले लिया है। बाजार में एक दर्जन से अधिक दुकानों और मकानों में गणगौर, ईसर व भाईयों की बिक्री, रंगाई व श्रृंगार का कार्य करने में पुरुषों के साथ महिलाएं व बच्चे भी लगे है। गणगौर प्रतिमा व्यवसाय से जुड़े महात्मा परिवार के सदस्यों के अनुसार गणगौर के सीजन में करीब 20 से 25 हजार गणगौर प्रतिमाओं की बिक्री होती है। बीकानेर शहर के साथ देश के विभिन्न इलाकों में प्रवास कर रहे लोग श्रद्धा भाव से गणगौर, ईसर के जोड़े के साथ भाईया की प्रतिमा को भी ले जाते है। बाजार में ७,१०,१२,१६ इंच सहित विभिन्न आकार की गणगौर की प्रतिमाएं है। ये प्रतिमाएं गहनों व कपड़ों सहित व बिना गहनें व कपड़ों के बिक्री होती है।

Published on:
03 Apr 2021 10:48 am
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