
बीकानेर. जिले के खारा गांव और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण और इससे लोगों की सेहत पर पड़ रहे असर को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सख्ती दिखाई है। न्यायाधिकरण ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाकर तीन सप्ताह में अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से बताया गया कि 21 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के नोटिस जारी किए है। वहीं, चिकित्सा विभाग के सर्वेक्षण में 694 घरों के सर्वे के दौरान 121 लोगों में श्वसन संबंधी बीमारियों के लक्षण सामने आने की जानकारी दी गई।
एनजीटी ने क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों की पालना सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। न्यायाधिकरण ने जरूरत के अनुसार पर्याप्त पौधरोपण कराने और लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही, पौधों के जीवित रहने और उनके संरक्षण से जुड़े मानकों की पालना सुनिश्चित करने को कहा।
यह मामला राम सिंह खारा के पत्र के आधार पर एनजीटी की ओर से स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किया गया था। पत्र में 12 दिसंबर 2025 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित 'प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों का बड़ा फैसला, कईयों ने बच्चों को नहीं भेजा स्कूल' शीर्षक की खबर का उल्लेख किया गया था। खबर में औद्योगिक प्रदूषण से परेशान ग्रामीणों की चिंताओं और कुछ परिवारों की ओर से बच्चों को स्कूल नहीं भेजने के फैसले को प्रमुखता से उठाया गया था। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ता ने भी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण और इससे मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई।
एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल में 26 अक्टूबर को न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई कर जवाब पेश नहीं करने वाले प्रतिवादियों को 3 सप्ताह का समय दिया है। वहीं, खारा औद्योगिक क्षेत्र (ग्रोथ सेंटर) की औद्योगिक इकाइयों की ओर से अधिवक्ता ने जवाब पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर पीठ ने दो सप्ताह की मोहलत दी। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।