शिक्षकों ने इस वर्ष कम अवधि के ग्रीष्मकालीन अवकाश को लेकर नाराजगी जताई है। लेकिन शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश समय से पहले घोषित नहीं किया जाएगा।
बीकानेर। राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बच्चों को सलाह दी है कि स्कूल आते वक्त गमछा, टोपी और पानी की बोतल साथ लेकर आएं। जिससे गर्मी से बचाव हो और शरीर में पानी की कमी भी नहीं रहे। शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को खुले में खेल प्रशिक्षण या कैंप नहीं लगाने तथा प्रार्थना सभा छायादार जगह या कक्षाओं में करने के निर्देश दिए गए है। साथ ही भारी भरकम बस्ते से मुक्ति दिलाने के लिए केवल आवश्यक पाठ्य पुस्तकें लाने की छूट दी गई है।
शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि गर्मी में यदि बच्चों की तबीयत खराब हो जाती है तो बाल वाहिनियों में प्राथमिक उपचार किट रखना अनिवार्य किया गया है।
हल्के लू-स्ट्रोक के इलाज के लिए ओआरएस घोल या नमक और चीनी का घोल उपलब्ध रखना होगा। स्कूलों को निकटतम अस्पताल एवं क्लीनिक के टेलीफोन नंबर प्रदर्शित करने के लिए स्थान तय करने के लिए कहा है।
आदेश में कहा गया है कि आवासीय विद्यालयों में स्टाफ नर्स के पास आवश्यक दवाएं रखना, शयनगृह में खिड़कियों पर परदे लगाना और नींबू, छाछ जैसे पेय को आहार में शामिल करना शामिल है। खेल-कूद की गतिविधियां शाम के समय आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश समय से पहले घोषित नहीं किया जाएगा। शिक्षकों ने इस वर्ष कम अवधि के ग्रीष्मकालीन अवकाश को लेकर नाराजगी जताई है। कॉलेज शिक्षा विभाग ने जहां 1 मई से 30 जून तक छुट्टियां घोषित की हैं, वहीं स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश 16 मई से 21 जून तक रहेगा।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि स्कूल तय कार्यक्रम के अनुसार ही खुले रहेंगे, ताकि शैक्षणिक लक्ष्य पूरे किए जा सकें। उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि गर्मी की छुट्टियों से पहले 20 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा कर लिया जाए और एक टेस्ट आयोजित किया जाए, जिससे छात्र छुट्टियों में पाठयक्रम की पुनरावृत्ति कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार शैक्षणिक सत्र 1 अप्रेल से शुरू हो चुका है और पहली बार मार्च में ही परिणाम घोषित किए गए।