Bikaner Crime: नाबालिग बालिका से सामूहिक बलात्कार और मारपीट के बहुचर्चित मामले में कोर्ट ने दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
Bikaner Crime: बीकानेर। नाबालिग बालिका से सामूहिक बलात्कार और मारपीट के बहुचर्चित मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालाय ने दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों दोषी अब जीवनभर जेल में रहेंगे। साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। विशेष पॉक्सो न्यायालय की न्यायाधीश डॉ. मनीषा चौधरी ने अभियुक्त सुभाष और धर्माराम उर्फ धर्मपाल को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषसिद्ध माना।
न्यायालय में विशिष्ट लोक अभियोजक शिवचंद भोजक ने 15 गवाहों के बयान और 23 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर अपराध प्रमाणित माना गया। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा जांच और न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
सुभाष को धारा 447 आईपीसी में दो माह का कठोर कारावास व 500 रुपए जुर्माना, धारा 323 आईपीसी में छह माह का कठोर कारावास व 1000 रुपए जुर्माना व धारा 376 डीए आईपीसी में शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास व 98,500 रुपए जुर्माने की सजा दी है।
धर्माराम उर्फ धर्मपाल को धारा 447 आईपीसी के तहत दो माह का कठोर कारावास व 500 रुपए जुर्माना, धारा 323 आईपीसी में छह माह का कठोर कारावास व 1000 रुपए जुर्माना व धारा 376 डीए आईपीसी में शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास व 98,500 रुपए जुर्माना लगाया है।
न्यायालय ने राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना-2011 के तहत पीड़िता को चार लाख रुपए प्रतिकर राशि देने की अनुशंसा की है। आदेश में कहा गया कि यदि पूर्व में कोई अंतरिम प्रतिकर राशि दी गई हो, तो उसे अंतिम प्रतिकर राशि में समायोजित किया जाएगा। यह राशि पीड़िता के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी।
निर्णय में अदालत ने कहा कि नाबालिग पीड़िता के पुनर्वास और भविष्य को देखते हुए केवल जुर्माना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357ए के तहत अतिरिक्त प्रतिकर राशि की अनुशंसा की गई। अदालत ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का भी उल्लेख किया।
न्यायालय ने माना कि आरोपी सुभाष ने नाबालिग से सामूहिक बलात्कार किया, जबकि धर्माराम उर्फ धर्मपाल ने अपराध में सहयोग करने के साथ पीड़िता और उसके परिजनों से मारपीट भी की। दोनों को घर में घुसकर अपराध करने का दोषी भी ठहराया गया।