साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि युगों से मंदिरों और प्रतिमाओं पर आक्रमण हुए, किंतु सनातन आस्था को कभी पराजित नहीं किया जा सका। प्रतिमाएं खंडित की जा सकती हैं, लेकिन आस्था नहीं।
बीकानेर। राममंदिर आंदोलन की प्रमुख वक्ता और ओजस्वी संत साध्वी ऋतंभरा के बीकानेर आगमन से शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बन गया है। शनिवार सुबह वे नाल एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
साध्वी ऋतंभरा 22 से 28 फरवरी तक पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा और 51 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ में कथा वाचन करेंगी। आयोजन को लेकर शहर में व्यापक तैयारियां की गई हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।
पत्रकारों से बातचीत में साध्वी ऋतंभरा ने हिंदू समाज को संगठित और सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, 'दुर्जनों की दुष्टता से ज्यादा खतरा सज्जनों की निष्क्रियता से होता है।' उन्होंने समाज से आत्मबल और साहस जागृत करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकारें अपना दायित्व निभाती हैं, लेकिन समाज को भी अपनी शक्ति पहचाननी होगी।
इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युगों-युगों से मंदिरों और प्रतिमाओं पर आक्रमण होते रहे हैं, किंतु सनातन आस्था को कभी पराजित नहीं किया जा सका। उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा कि 'प्रतिमाएं खंडित की जा सकती हैं, लेकिन आस्था को नहीं तोड़ा जा सकता'।
यह आयोजन सनातन धर्म रक्षा समिति के तत्वावधान में हो रहा है। 21 फरवरी को नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें साध्वी ऋतंभरा भी शामिल हुईं। उज्जैन का डमरू दल और पुणे से आई महिलाओं व युवतियों की टीम ने ढोल-नगाड़ों के साथ आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।
आयोजन के तहत 51 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ भी संपन्न होगा। यज्ञाचार्य पंडित सिद्धार्थ पुरोहित (बाला महाराज) के निर्देशन में विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना से 1 लाख 65 हजार आहुतियां दी जाएंगी। आयोजन समिति के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह महायज्ञ मानवता के कल्याण और विश्व शांति के उद्देश्य से किया जा रहा है। बीकानेर में अगले एक सप्ताह तक भक्ति, प्रवचन और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण बना रहेगा।