
बीकानेर में लोकतंत्र और मीडिया विषयक पत्रिका की-नोट कार्यक्रम, पत्रिका फोटो
Rajasthan Patrika keynote Bikaner: भारतीय संविधान को आत्मसात करने के बाद देश में मीडिया ने जनप्रहरी की भूमिका निभाई है। प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया तक, पत्रकारिता आज भी अपने मूल भाव जनता के लिए और जन-कल्याण के साथ कार्य कर रही है। यह विचार विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. बी.डी कल्ला ने व्यक्त किए। वे राजस्थान पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश की जन्मशती वर्ष के तहत शुक्रवार को बीकानेर में होटल बसंत विहार के दरबार हॉल में आयोजित ‘लोकतंत्र और मीडिया’ विषयक पत्रिका की-नोट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. कल्ला ने कहा कि आज के समय में खोजपरक और निर्भीक पत्रकारिता की सबसे अधिक आवश्यकता है, ताकि लोकतंत्र सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि राजनीति में सेवा भावना से आएं, मेवा भावना से नहीं। जनप्रतिनिधियों को जनता के कल्याण की भावना से कार्य करना चाहिए। लोकतंत्र को मजबूत रखना है, तो मीडिया को भी मजबूत बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। पक्ष हो या विपक्ष, संसद हो या राज्य विधानसभा, आलोचना को स्थान मिलना चाहिए। तर्क के साथ अपनी बात रखी जानी चाहिए और तर्क के साथ ही उसका प्रतिकार भी होना चाहिए।
पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कहा कि पाठकों को सर्वोपरि मानने वाले कुलिशजी ने पत्रकारिता को जीवित रखते हुए हमेशा सच को आगे रखा। पाठक की बात को तव्वजों देते हुए पत्रकारिता के धर्म को निभाया। 50 साल में पत्रिका ने मीडिया में प्रहरी के रूप में काम किया। योजनाओं की खामियों को उजागर करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। सबकी खबर ले, सबको खबर दे, वाली पत्रकारिता पत्रिका करता है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी ने समाज, शिक्षा, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और पत्रकारिता के मूल स्वरूप पर गहन चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकारिता व्यापार नहीं, साधना है। पत्रकार साधु की तरह समाज को देने के लिए जीता है। उसकी प्राथमिकता जनहित और राष्ट्रचिंतन होती है।
डॉ. कोठारी ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की शिक्षा मनुष्य को ‘मानव संसाधन’ बना रही है। हमने इंसान को भेजा था, शिक्षा उसे संसाधन बनाकर लौटा रही है। हम शरीर नहीं, आत्मा हैं। यह बोध शिक्षा से लुप्त होता जा रहा है। बच्चों को अपनी भाषा, अपने शहर और अपनी संस्कृति से दूर किया जा रहा है। यदि हिंदी नहीं पढ़ेंगे, तो शास्त्र कैसे समझेंगे? यदि अपने ही शहर का भूगोल नहीं जानेंगे, तो मिट्टी से कैसे जुड़ेंगे?
द्रोणाचार्य अवार्डी आरडी सिंह ने कहा कि आपातकाल में भी पत्रिका ने अपनी लेखनी को झुकने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया का काम सिर्फ कमियां निकालना ही नहीं, बल्कि समाज में ऊर्जा व सकारात्मकता का संचार करना भी है। कुलिशजी का जीवन हमें सिखाता है कि चाहे हम हाथ में बल्ला थामें या कलम, हमारी नियत साफ व नजर लक्ष्य पर होनी चाहिए। लोकतंत्र तभी फलेगा और फूलेगा, जब मीडिया अपनी निष्पक्षता को जीवित रखेगा।
कार्यक्रम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि सच लिखना एक चुनौती बन गया है। पक्ष-विपक्ष संसदीय परम्पराओं से दूर होकर शोर-गुल करना शुरू करते है, कागज फाड़कर फेंकना शुरू कर देते है। दूसरे दिन उनकी फोटो भी अखबारों में छपती है, यह चिंता का विषय है। चौबीसों घंटे चलते न्यूज चैनल, एआइ का बढ़ता दखल, खबरों की सच्चाई पर उठते सवालों से विश्वास के रिश्तों में कमी आई है। चटपटी और सनसनी फैलाने वाली खबरें बढ़ रही हैं। पहले खबर देने की भूख में सच्चाई छिपती जा रही है।
कार्यक्रम में जयपुर ग्रेटर की पूर्व मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर ने कहा कि मीडिया का काम सिर्फ खबरें देना नहीं है। हमारी कला, विरासत तथा संस्कृति की अनुभूति करवाना भी है। राजस्थान पत्रिका ने लोकतंत्र को स्थापित करने वाले सेतु के रूप में भूमिका निभाई है। विधायक, कार्यपालिका, न्याय पालिका का उद्देश्य भी सर्वे भवन्तु सुखिनः का है। उसी तरह इनके और जनता के बीच सेतु की भूमिका निभाने वाले मीडिया का काम भी यह देखना है कि सभी सुखी है या नहीं। राजस्थान पत्रिका ने यह कार्य बखूबी किया है।
Published on:
20 Feb 2026 10:25 pm
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