रावी-व्यास नदी के पानी में से राजस्थान के हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल रहा है। इस अंतरराज्यीय जल विवाद का निपटारा करने के लिए केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीशों का टि्रब्यूनल गठित कर रखा है। यह टि्रब्यूनल इंदिरा गांधी नहर की टेल तक दौरा कर वापस लौट गया है। किसानों और अधिकारियों ने बताई पानी की जरूरत।
बीकानेर. रावी-व्यास नदियों के जल विवाद को लेकर गठित ट्रिब्यूनल रविवार को राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र का दौरा करने के बाद दिल्ली लौट गया। पंजाब व हरियाणा का दौरा करने के बाद ट्रिब्यूनल का आखिरी पड़ाव राजस्थान था। यहां बड़े भूभाग की सिंचाई और पेयजल की जरूरत को रावी-व्यास नदियों का पानी इंदिरा गांधी नहर के माध्यम से पूरा करता है।
ट्रिब्यूनल अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनीत सरन, न्यायाधीश सुमन श्याम व न्यायाधीश नवीन राव के साथ केन्द्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधि तथा राजस्थान सहित पंजाब व हरियाणा के अधिकारी तथा इंदिरा गांधी नहर के अधिकारियों ने 5 से 8 मार्च तक बीकानेर से जैसलमेर तक इंदिरा गांधी नहर के नहरी तंत्र का जायजा लिया। दौरे के प्रथम दिन ट्रिब्यूनल ने इंदिरा गांधी नहर की आरडी 507 के पास पेयजल संग्रहण के लिए बनाए गए रिजर्व वायर को देखा।
दूसरे दिन इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र का हवाई सर्वे करने के बाद तीसरे और चौथे दिन ट्रिब्यूनल ने सागरमल गोपा नहर की बाबा रामदेव डिस्ट्रीब्यूट्री और भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास इंदिरा गांधी नहर की टेल तक हालात का जायजा लिया।रेल से अटे खाळे देखेभारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रेत से अटे पक्के खाळों को देख ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने अधिकारियों ने इसकी वजह पूछी तो अधिकारियों ने बताया कि समझौते के अनुसार पानी नहीं मिलने से यहां तक पानी नहीं पहुंचता। जिससे जिन किसानों को भूमि आवंटित हुई थी वे वापस चले गए और सिंचाई के लिए बने खाळे धीरे-धीरे रेत से पट गए।
ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने इंदिरा गांधी नहर की बीरबल शाखा का निरीक्षण करते समय वहां के किसानों से बातचीत की। किसानों ने बताया कि उन्हें पूरा पानी मिले तो यह इलाका सरसब्ज हो सकता है। राजस्थान का मजबूत पक्ष रखने के लिए अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल के सदस्यों को उप प्वाइंट का निरीक्षण करवाया जो पानी की कमी की कहानी बयान कर रहे थे। ट्रिब्यूनल के इस दौरे के दौरान राजस्थान के अधिकारी यह बताने में सफल रहे कि रावी-व्यास के पानी में प्रदेश का जो हिस्सा है, वह मिल जाए तो इस रेगिस्तानी इलाके की तस्वीर बदल सकती है।
तीनों राज्यों का दौरा होने के बाद ट्रिब्यूनल का आखिरी पड़ाव हरिके हैडवर्क्स रहेगा। यहां से इंदिरा गांधी नहर में पानी प्रवाहित होता है। इसके साथ ही दौरे की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद ट्रिब्यूनल चाहेगा तो तीनों राज्यों को सुनवाई का मौका देकर अपना फैसला दे देगा। हरिके हैडवर्क्स का दौरा इसी माह या अगले माह हो सकता है।
रावी-व्यास नदियों के अधिशेष पानी के बंटवारे के बारे में पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के बीच 31 दिसम्बर 1981 को समझौता हुआ, जिसके तहत राजस्थान को 8.60 एमएएफ पानी देना तय हुआ। उस समय इंदिरा गांधी नहर का सिंचाई तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं हुआ था, इसलिए पंजाब ने 8.00 एमएएफ पानी ही राजस्थान को दिया। शेष .60 एमएएफ पानी सिंचाई तंत्र विकसित होने पर देने का वादा किया। इंदिरा गांधी नहर के प्रथम एवं द्वितीय चरण में सिंचाई तंत्र विकसित हुए कई दशक बीत जाने पर भी पंजाब शेष पानी देने में आनाकानी कर रहा है। इस विवाद के निपटारे के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया गया।