बिलासपुर

अफीम रखने का था झूठा आरोप! व्यवसायी को 31 साल बाद मिला न्याय, कोर्ट ने कहा..

CG News: बिलासपुर जिले में पुलिस द्वारा झूठा प्रकरण दर्ज कर ढाई साल जेल में रखने के मामले में व्यवसायी को 31 साल बाद न्याय मिला है।

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CG News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस द्वारा झूठा प्रकरण दर्ज कर ढाई साल जेल में रखने के मामले में व्यवसायी को 31 साल बाद न्याय मिला है। हाईकोर्ट ने उनकी अपील पर सुनवाई के बाद 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने का निर्देश राज्य शासन को दिया है। डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि राज्य सरकार चाहे तो उक्त रकम दोषी पुलिस अधिकारियों से वसूल सकती है। इससे पावर का दुरुपयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों को उनकी करनी की सजा मिलेगी।

CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट..

प्रकरण के अनुसार सेक्टर-6 भिलाई निवासी प्रदीप जैन की साइकिल दुकान है। साथ ही वह सामाजिक तौर पर सक्रिय रहते हुए पुलिस अत्याचारों के विरुद्ध उसने समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित कराए थे। इससे एएसआई आर.के. रॉय व अन्य उनसे विद्वेष रखने लगे। प्रदीप जैन के छोटे भाई की पत्नी के आत्महत्या के मामले में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई।

उस समय एएसआई आर.के. रॉय सुपेला थाने में पदस्थ थे। 28 दिसंबर 1994 की रात्रि प्रदीप जैन और उनकी पत्नी साधना जैन को सुपेला थाने में पूछताछ के लिए जबरन बुलाया गया। प्रदीप जैन से मारपीट की गई और एएसआई ने उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। दूसरे दिन साधना जैन को तो सिटी कोतवाली भेज दिया गया, लेकिन प्रदीप जैन को थाना सुपेला में रोक लिया गया।

अफीम बेचने का झूठा मामला दर्ज किया पुलिस ने

मोहन नगर दुर्ग थाने के अंतर्गत तितुरडीह से प्रदीप जैन को इस आधार पर गिरफ्तार कर लिया कि वह अफीम बेचने का प्रयास कर रहा था। उसके कब्जे से 180 ग्राम अफीम बरामद कर ट्रायल कोर्ट में चालान प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान जैन की ओर से तर्क दिया गया कि 28 दिसंबर 1994 से करीब ढाई साल तक वह लगातार पुलिस अभिरक्षा में रहा।

ऐसी हालत में यह कैसे माना जा सकता है कि 29 दिसंबर 1994 को शाम तीन बजे वह तितुरडीह में अफीम बेचने का प्रयास कर रहा था। जेल से छूटने के बाद उन्होंने झूठे अभियोजन में फंसाने पर संबंधितों पर कार्रवाई के लिए मामला प्रस्तुत किया। लेकिन जिला न्यायालय दुर्ग ने इसे खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे प्रदीप

इसके बाद प्रदीप जैन ने हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत की। जस्टिस रजनी दुबे, जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने सुनवाई में पुलिस अधिकारियों को दोषी पाकर पीड़ित को 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति 6 प्रतिशत ब्याज दर से दो माह के अन्दर देने का आदेश दिया। इस मामले के दोषी एक अधिकारी की मृत्यु हो गई है। वहीं दो अधिकारी एम.डी. तिवारी व शमी सेवानिवृत्त हो गए हैं। सरकार चाहे तो इनसे क्षतिपूर्ति राशि वसूल सकती है।

Updated on:
26 Apr 2025 12:05 pm
Published on:
26 Apr 2025 08:47 am
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