
BAMS Counselling Update: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुर्ग स्थित भारती आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2026-27 में BAMS पाठ्यक्रम की 100 सीटों की काउंसलिंग में शामिल होने की सशर्त अनुमति दी है। हालांकि, इस आदेश के बाद भी कॉलेज के लिए विद्यार्थियों को सीधे प्रवेश देने का रास्ता साफ नहीं हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति का मतलब दाखिले की मंजूरी नहीं है। यदि कॉलेज किसी विद्यार्थी को प्रवेश देना चाहता है, तो उसे इसके लिए हाई कोर्ट से अलग अनुमति लेनी होगी।
जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने यह राहत कॉलेज की द्वितीय अपील के अंतिम फैसले के अधीन रखी है। भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग के समक्ष कॉलेज की अपील लंबित है। ऐसे में कॉलेज को काउंसलिंग में शामिल होने का अवसर तो मिलेगा, लेकिन आगे की प्रक्रिया अदालत की तय शर्तों के अनुसार ही पूरी करनी होगी।
भारती आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए BAMS पाठ्यक्रम की 100 सीटों पर विद्यार्थियों को प्रवेश देने की वार्षिक अनुमति नहीं मिलने के फैसले को चुनौती दी थी। कॉलेज ने दो जुलाई 2026 को जारी आदेश और इसके खिलाफ दायर पहली अपील को 12 अगस्त को खारिज किए जाने के निर्णय के विरुद्ध हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कॉलेज की ओर से अदालत को बताया गया कि 26 फरवरी 2026 को संस्थान का औचक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए अनुमति रोक दी गई। कॉलेज ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए अपना पक्ष रखा। कॉलेज का कहना था कि निरीक्षण के समय प्राचार्य पहले से निर्धारित संगोष्ठी में शामिल होने के लिए गए हुए थे। इसके अलावा, निरीक्षण दल के आने की सूचना कुछ समय पहले ही ईमेल के माध्यम से मिली थी। कॉलेज ने अपने पक्ष के समर्थन में संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे।
पहली अपील खारिज होने के बाद कॉलेज ने 15 सितंबर 2026 को भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग के समक्ष द्वितीय अपील दायर की। हालांकि, इस अपील पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ था। इसी बीच BAMS पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए काउंसलिंग की तारीखें नजदीक आ गईं।
कॉलेज की ओर से अदालत को बताया गया कि केंद्रीय स्तर की काउंसलिंग 14 से 23 अक्टूबर और राज्य स्तरीय काउंसलिंग 24 से 29 अक्टूबर तक निर्धारित है। यदि द्वितीय अपील पर समय रहते फैसला नहीं होता, तो कॉलेज को काउंसलिंग में शामिल होने का अवसर गंवाना पड़ सकता था। इसी आधार पर कॉलेज ने अंतरिम राहत की मांग की, ताकि अपील के अंतिम निर्णय तक उसे काउंसलिंग प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर न रहना पड़े।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने माना कि द्वितीय अपील लंबित रहने के कारण कॉलेज को काउंसलिंग से बाहर रखने पर उसे नुकसान हो सकता है। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने कॉलेज को केंद्रीय, राज्य और आगे होने वाली काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दे दी। हालांकि, यह राहत बिना शर्त नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलेज को मिली अनुमति द्वितीय अपील के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
यानी अपील पर जो भी अंतिम फैसला होगा, उसका असर इस अंतरिम राहत पर भी पड़ेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति को 100 सीटों पर प्रवेश की वार्षिक मंजूरी नहीं माना जा सकता। कॉलेज इस आदेश के आधार पर सीधे विद्यार्थियों को दाखिला देने का दावा नहीं कर सकेगा।
हाई कोर्ट ने विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कॉलेज को काउंसलिंग के दौरान स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। कॉलेज को बताना होगा कि उसकी अनुमति से जुड़ा मामला राष्ट्रीय आयोग के समक्ष द्वितीय अपील में लंबित है। विद्यार्थियों को भी यह जानकारी दी जाएगी कि काउंसलिंग में उनकी भागीदारी कॉलेज की अपील के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी। इससे प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को मामले की मौजूदा स्थिति की जानकारी रहेगी और वे उसी के आधार पर निर्णय ले सकेंगे।
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि भारती आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज को फिलहाल सिर्फ काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति मिली है। यदि कॉलेज किसी विद्यार्थी को BAMS पाठ्यक्रम में प्रवेश देना चाहता है, तो उसे इसके लिए हाई कोर्ट में अलग आवेदन करना होगा।
अदालत की अनुमति के बिना कॉलेज केवल काउंसलिंग में भाग लेने के आदेश को आधार बनाकर विद्यार्थियों को दाखिला देने का अधिकार नहीं जता सकेगा। इस तरह हाई कोर्ट ने एक ओर कॉलेज को काउंसलिंग में शामिल होने का अवसर दिया है, तो दूसरी ओर प्रवेश प्रक्रिया को अंतिम अपील के नतीजे और न्यायालय की अनुमति से जोड़ दिया है।
इन शर्तों के साथ हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। अब कॉलेज की द्वितीय अपील पर आने वाले अंतिम फैसले और दाखिले के लिए जरूरी अलग अनुमति पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी। विद्यार्थियों के लिए भी जरूरी है कि वे काउंसलिंग में शामिल होने से पहले कॉलेज की अनुमति की स्थिति और अदालत के आदेश में तय शर्तों की जानकारी अवश्य लें।