बिलासपुर

एक सिस्टम ने आसान की लुटेरों की पहचान, बिलासपुर में 150 पुलिसकर्मियों को समझाया गया बीट सिस्टम

New Criminal Laws Training: बिलासपुर में 150 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तीन दिवसीय ट्रेनिंग दी गई। बीट सिस्टम, ज्वेलरी शॉप लूट, साइबर अपराध, नए कानून, CCTNS और फॉरेंसिक तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण हुआ।
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Chhattisgarh Police Training
बिलासपुर में 150 पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग (Photo Source- Patrika)

Chhattisgarh Police Training: बिलासपुर में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने के लिए 150 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तीन दिवसीय रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स कराया गया। ट्रेनिंग में अपराध की रोकथाम से लेकर नए आपराधिक कानून, साइबर क्राइम, फॉरेंसिक और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल तक कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। इस दौरान ज्वेलरी शॉप लूट के आरोपियों की पहचान में बीट सिस्टम की भूमिका को भी प्रमुखता से समझाया गया।

Beat System Police: ज्वेलरी शॉप लुटेरों की पहचान में काम आया बीट सिस्टम

आईजी रामगोपाल गर्ग ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि ज्वेलरी शॉप लूट के आरोपियों की पहचान करने में बीट सिस्टम और पुलिस के लगातार प्रयास महत्वपूर्ण रहे। उन्होंने बीट सिस्टम को अपराध की रोकथाम और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने का अहम माध्यम बताया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर लगातार संपर्क और क्षेत्र की जानकारी रखने से किसी घटना के बाद संदिग्धों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से पुलिसकर्मियों को बीट व्यवस्था को और मजबूत तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया।

बदलती पुलिसिंग के साथ तकनीकी प्रशिक्षण

कोर्स की शुरुआत डीआईजी रजनेश सिंह ने की। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में लगातार बदलाव हो रहा है और नई तकनीकें भी जुड़ रही हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण जरूरी है। इससे काम के दौरान आने वाली परेशानियों को समझने और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को पीटी-परेड, हथियारों को खोलने और जोड़ने तथा बलवा ड्रिल का अभ्यास कराया गया। इन गतिविधियों के जरिए शारीरिक क्षमता, अनुशासन और टीमवर्क को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।

नए कानूनों और साइबर अपराध की भी पढ़ाई

प्रशिक्षण में नए आपराधिक कानूनों को भी उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध, CCTNS और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी यानी FSL के इस्तेमाल से जुड़े विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। पुलिसिंग में तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इसे कोर्स का महत्वपूर्ण हिस्सा रखा गया।

तनाव प्रबंधन और स्वास्थ्य पर भी फोकस

पुलिसकर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तनाव प्रबंधन पर विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। ब्रह्माकुमारी संस्था की स्वाति दीदी ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तनाव कम करने तथा काम के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने के तरीके बताए। इसके साथ ही योग और फिजियोथैरेपी से जुड़े अभ्यास भी कराए गए। नियमित योग और सही व्यायाम के जरिए शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रखने की जानकारी दी गई।

जनसहयोग से मजबूत होगी कानून-व्यवस्था

समापन सत्र में आईजी रामगोपाल गर्ग ने पुलिस और आम लोगों के बीच बेहतर संवाद और भरोसे को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जनसहयोग से अपराधों की रोकथाम के साथ कानून-व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रशिक्षुओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

Updated on:
26 Sept 2026 06:56 pm
Published on:
26 Sept 2026 06:56 pm