बिलासपुर

बिलासपुर हाईकोर्ट सख्त: जर्जर सड़कों पर पीडब्ल्यूडी ईई से जवाब तलब, सिरगिट्टी सड़क 25 लाख में बनाएंगी निजी कंपनियां

High Court: बिलासपुर समेत प्रदेश की जर्जर सड़कों और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। डिवीजन बेंच ने अधूरे और शुरू न हो पाए कार्यों को लेकर नाराजगी जताते हुए लोक निर्माण विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से शपथपत्र में जवाब मांगा है।

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हाईकोर्ट (photo-patrika)

Bilaspur High Court: बिलासपुर और आसपास की जर्जर सड़कों को लेकर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने लोक निर्माण विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (ईई) को शपथपत्र में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा कि नेहरू चौक से पेंड्रीडीह (रायपुर रोड) तक सड़क का निर्माण कब होगा? शासन की ओर से कहा गया कि एनआईटी रायपुर की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही काम तेजी से शुरू किया जाएगा।

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कोर्ट कमिश्नर ने प्रस्तुत की थी बदहाल सड़कों की लिस्ट

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया कि, एनएच-343 (बलरामपुर-रामानुजगंज रोड) की हालत बेहद खराब है, यहां दो-दो फीट गहरे गड्ढे हैं, जिनमें भारी वाहन फंस जाते हैं। इसी तरह रायगढ़ जिले में 9 ब्लैक स्पाट, बिलासपुर में 2, मुंगेली में 4 और बलौदाबाजार-भाटापारा में 4 ब्लैक स्पाट मिले हैं। शहर के अंदर नए पुल से नेहरू चौक, दयालबंद, गांधी चौक से सीएमडी मार्ग सहित कई सड़कें खराब हैं।

रायगढ़ के कुनकुरी इलाके में कोल वॉशरी की वजह से काली धूल सडक़ों पर फैल रही है और हादसों का कारण बन रही है। डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि सड़कों की दुर्दशा और लापरवाही से हो रहे हादसे बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

निजी कंपनियां 25 लाख में बनाएंगी सिरगिट्टी की तीन किमी सड़क

सिरगिट्टी क्षेत्र में औद्यौगिक कंपनियों की गाडिय़ों के कारण सडक़ें खराब हो रही हैं। यहां से दाधापारा तक तीन किलोमीटर की सडक़ खराब हो गई है। इसके कारण आने जाने वालों को परेशानी हो रही है। हाईकोर्ट के संज्ञान पर जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि दो कोल कंपनियों की गाडिय़ां इस रास्ते से जा रहीं थीं। इसमें छग कोल पावर बेनिफिशरी और मेसर्स अमित कोल लाइंस ने सड़क को 25 लाख रुपए में सुधारने और उसके रखरखाव का जिम्मा उठाया है। इस पर शपथपत्र में जानकारी देने के निर्देश कोर्ट ने दिए हैं।

‘जिला अस्पताल में रैबीज व टिटनेस के टीके नहीं, कोर्ट कमिश्नर वस्तुस्थिति बताएं’

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रीएजेंट की कमी के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को जानकारी मिली कि शहर के जिला अस्पताल में रैबीज और टिटनेस के टीके भी पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर को वस्तुस्थिति की जानकारी लेने के निर्देश देते हुए 8 अप्रैल को ही प्रकरण की सुनवाई तय की है।

उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में सीजीएमएसी ने रीएजेंट खरीदी के लिए टेंडर करने की बात कही थी। शासन की ओर से भी कहा गया कि बाजार से रीएजेंट की खरीदी की जा रही है। कोर्ट ने इस पर स्वास्थ्य सचिव को शपथपत्र पर वस्तुस्थिति बताने कहा था। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में यह बात आई कि स्थानीय जिला अस्पताल में रैबीज व टिटनेस के टीकों की भी कमी है। इस पर शासन की ओर से उपलब्धता की बात कही गई। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कोर्ट कमिश्नर को निर्देशित किया कि वे इस संबन्ध में सही जानकारी लेकर प्रस्तुत करें।

प्रदेश भर में परेशानी

उल्लेखनीय है कि रीएजेंट की कमी के कारण बिलासपुर, बलौदाबाजार, कोरबा, दंतेवाड़ा, कवर्धा, गरियाबंद, मुंगेली, नारायणपुर, राजनांदगांव, सुकमा, बलरामपुर और गौरेला पेंड्रा मरवाही सहित कई जिलों में रीएजेंट किट की कमी के कारण आवश्यक टेस्ट बंद हैं। अव्यवस्था पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी कि स्वास्थ्य विभाग में खरीदी गई लाखों की मशीनें सिर्फ रखने के लिए नहीं होनी चाहिए। इनसे जांच हो और नियमित समय पर रिपोर्ट मिले, इसकी व्यवस्था सरकार और स्वास्थ्य विभाग को करनी होगी।

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Published on:
08 Apr 2026 01:02 pm
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