
हाईकोर्ट (photo-patrika)
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल परीक्षा में शामिल होने मात्र से किसी भी आवेदक को नियुक्ति पाने या परिणाम घोषित करवाने का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता। अगर चयन प्रक्रिया के बीच में सरकार को पता चलता है कि नियम वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ हैं, तो वह पूरी प्रक्रिया को कभी भी रद्द कर सकती है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में असिस्टेंट ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत अचिंता भौमिक, उत्तम यादव, पूनम केरकेट्टा, संजय मनवानी, संदीप कुमार मरकाम सहित अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थी। इसमें बताया कि विभाग ने इंस्पेक्टर, विधिक माप विज्ञान के पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पहले सामान्य स्नातकों को पात्र माना, लेकिन बाद में परीक्षा होने के बाद 20 जनवरी 2023 को पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर दी।
सभी रिट याचिकाओं में कानून और तथ्य का एक समान प्रश्न शामिल होने के कारण अधिवक्ताओं की सहमति से हाईकोर्ट ने सभी की एक साथ सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनकी उम्मीदवारी की विधिवत जांच की गई थी और प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा सत्यापित की गई थी। इसके बाद ही उन्हें निरीक्षक के पद पर प्रमोशन के लिए विभागीय पदोन्नति परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने 17 दिसंबर 2022 को आयोजित परीक्षा में भाग लिया। हालांकि, बाद में और परिणाम घोषित किए बिना, पूरी भर्ती-पदोन्नति प्रक्रिया रोक दी गई। कुछ याचिकाकर्ताओं को उक्त विभागीय परीक्षा में भाग लेने के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया गया।सभी याचिकाकर्ताओं की मुख्य शिकायत निरीक्षक (कानूनी मापन) के पद के लिए विभागीय पदोन्नति प्रतियोगी परीक्षा को रद्द करने के विरुद्ध है।
350 दिन की देरी पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य की अपील खारिज, बोले- विभागीय प्रक्रिया नहीं बन सकती बहाना- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में 350 दिन की देरी से दायर राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि देरी माफ करना अपवाद है, इसे अधिकार की तरह नहीं लिया जा सकता… पूरी खबर पढ़े
540 करोड़ के कोयला घोटाले में सख्ती, आरोपी देवेंद्र डडसेना की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने ठुकराई- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित कोयला लेवी और आर्थिक अपराध से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी देवेंद्र डडसेना की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं और ऐसे मामलों में जमानत देने में विशेष सावधानी बरतनी जरूरी है… पूरी खबर पढ़े
Published on:
04 Apr 2026 02:43 pm
बड़ी खबरें
View Allबिलासपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
