
Bilaspur: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में आत्मनिर्भर बनने की चाह अगर मजबूत हो तो छोटी-सी शुरुआत भी बड़े मुकाम तक पहुंच सकती है। बिलासपुर की सोनल अग्रवाल की कहानी इसका उदाहरण है। नौवीं कक्षा में उन्होंने पुराने कपड़ों से बैग बनाकर अपने जेब खर्च की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे यही काम उनके व्यवसाय में बदल गया। आज उनके बनाए डिजाइनर बैग शोरूम और शॉपिंग मॉल तक पहुंच रहे हैं। उनके व्यवसाय से वर्तमान में 8 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
सोनल की शुरुआत आर्थिक चुनौतियों के बीच हुई। उन्हें अपने छोटे-छोटे खर्चों के लिए परिवार से पैसे मांगना पसंद नहीं था। इसी दौरान उन्होंने अपनी बड़ी बहन से बैग बनाने का हुनर सीखा। इसके बाद पुराने कपड़ों से आकर्षक बैग तैयार कर उन्हें बेचने लगीं। शुरुआत में यह काम सिर्फ जेब खर्च तक सीमित था, लेकिन ग्राहकों की पसंद बढ़ने के साथ सोनल ने काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने नए कपड़े खरीदकर अलग-अलग डिजाइन के बैग तैयार करना शुरू किया और अपने उत्पादों में लगातार बदलाव करती रहीं।
समय के साथ सोनल के बनाए बैग लोगों को पसंद आने लगे। धीरे-धीरे उन्हें बाजार में पहचान मिलने लगी। उनके काम को उस समय नई दिशा मिली, जब हस्तशिल्प विभाग के एक अधिकारी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। अधिकारी की मदद से सोनल का महिला उद्यमी के रूप में उद्योग विभाग में पंजीयन हुआ। इसके बाद उन्हें सरकारी प्रदर्शनियों में अपने उत्पादों का स्टॉल लगाने के अवसर मिलने लगे। प्रदर्शनियों में उनके बैग को अच्छा प्रतिसाद मिला और उनका कारोबार लगातार बढ़ता गया।
सोनल ने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ दूसरी महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया। वर्तमान में उनके काम से 8 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। वह महिलाओं को हुनर सीखने और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। सोनल का कहना है कि आत्मविश्वास, मेहनत और लगातार प्रयास से कोई भी व्यक्ति छोटी शुरुआत को बड़े काम में बदल सकता है।
सोनल ने महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए महिला उद्यमी संघ भी बनाया है। इसके जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में 50 से अधिक महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू कर चुकी हैं। सोनल का मानना है कि महिलाओं को सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और अपने हुनर पर भरोसा करने का आत्मविश्वास भी मिलना चाहिए।
नौवीं कक्षा में जेब खर्च के लिए पुराने कपड़ों से बैग बनाने वाली सोनल आज अपने कारोबार के जरिए दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं। उनका सफर बताता है कि किसी भी बड़े काम की शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास उसे नई पहचान दे सकते हैं।