
Aniruddhacharya Maharaj Katha: जात-पात से लेकर नारी सम्मान तक(photo=patrika)
Aniruddhacharya Maharaj Katha: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह में आयोजित नौ दिवसीय धार्मिक कथा का आज अंतिम दिन है। प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज की कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। नौ दिनों तक चले इस धार्मिक समागम में भागवत कथा और धार्मिक प्रसंगों के साथ सनातन धर्म, सत्संग, सामाजिक एकता और नारी सम्मान जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कथावाचक ने बदलते डिजिटल दौर में सतर्क रहने और अच्छे विचारों से जुड़े रहने का संदेश भी दिया। आयोजन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने भागवत कथा और रामकथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कलयुग में सत्संग मानव जीवन में सुधार और धर्म-अध्यात्म से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि धार्मिक कथा का उद्देश्य केवल प्रसंग सुनना नहीं है, बल्कि उससे मिलने वाली सीख को अपने व्यवहार और जीवन में उतारना भी है। सत्संग व्यक्ति को आत्मचिंतन करने और अपने विचारों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
कथा के दौरान अनिरुद्धाचार्य महाराज ने छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों की भी प्रशंसा की। उन्होंने ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ कहते हुए प्रदेशवासियों की सहजता, सरलता और धार्मिक आस्था की तारीफ की। उन्होंने कहा कि समाज में एकता बनाए रखना जरूरी है और लोगों को आपसी मतभेद से बचना चाहिए। उनके अनुसार सनातन परंपरा परिवार और समाज को जोड़ने का संदेश देती है।
प्रवचन के दौरान अनिरुद्धाचार्य महाराज ने जाति और सामाजिक विभाजन के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जात-पात के नाम पर लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश समाज के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने इतिहास में सामाजिक विभाजन के प्रभावों का उल्लेख करते हुए लोगों से आपसी एकता बनाए रखने की अपील की। विवाह व्यवस्था पर भी उन्होंने अपने विचार रखे और अंतरजातीय विवाह को लेकर अपने सामाजिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण की बात कही।
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने प्रवचन के दौरान नारी सम्मान के विषय पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में महिलाओं के सम्मान को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने महिलाओं और समाज के अपमान से बचने तथा परिवार में सम्मान, संस्कार और आपसी सद्भाव बनाए रखने की बात कही। साथ ही पारिवारिक एवं सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया।
धार्मिक समागम के दौरान बदलते डिजिटल दौर को लेकर भी श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि आज लोगों के पास जानकारी और मनोरंजन के कई माध्यम मौजूद हैं, लेकिन जीवन को सही दिशा देने के लिए अच्छे विचार और सत्संग भी जरूरी हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म और अध्यात्म से जुड़े रहने तथा अपने विचारों और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की अपील की।
बम्हनीडीह में चल रही नौ दिवसीय कथा का आज अंतिम दिन है। समापन के मौके पर आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों की ओर से कथा के अंतिम दिन के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। नौ दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में भागवत कथा के साथ सामाजिक और पारिवारिक विषयों पर भी चर्चा हुई। अंतिम दिन भी श्रद्धालु अनिरुद्धाचार्य महाराज की कथा और प्रवचन सुनने पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन का विधिवत समापन होगा।
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Updated on:
19 Sep 2026, 5:30 PM IST
Published on:
19 Sep 2026, 5:29 PM IST
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