बिलासपुर

CG High Court: 540 करोड़ के कोयला घोटाले में सख्ती, आरोपी देवेंद्र डडसेना की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने ठुकराई, जानें क्या कहा?

Bilaspur High Court: बहुचर्चित 540 करोड़ के कोयला लेवी घोटाले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी देवेंद्र डडसेना की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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Updated: 3 Apr 2026, 1:20 PM IST
Bilaspur High Court
Bilaspur High Court: (photo-patrika)

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित कोयला लेवी और आर्थिक अपराध से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी देवेंद्र डडसेना की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं और ऐसे मामलों में जमानत देने में विशेष सावधानी बरतनी जरूरी है। यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो/इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज अपराध से जुड़ा है। इसमें आईपीसी की धारा 384, 420, 120-बी, 467, 468, 471 तथा प्रिवेन्शन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के आधार पर सामने आया कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर अवैध वसूली का बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस सिंडिकेट द्वारा करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। इस पूरे मामले में कई नौकरशाह, कारोबारी और अन्य लोग शामिल बताए गए हैं।

आरोपी की भूमिका क्या रही

अदालत में पेश दस्तावेजों और केस डायरी के अनुसार, देवेंद्र डडसेना कथित तौर पर इस सिंडिकेट में अहम कड़ी था। उस पर अवैध वसूली की रकम लेने और बांटने का आरोप है। जब्त डायरी और गवाहों के बयान में लगभग 52 करोड़ रुपये के लेनदेन का उल्लेख मिला। जांच में यह भी सामने आया कि यह राशि राजनीतिक और अन्य खर्चों में उपयोग की गई।

आरोपी की ओर से कहा गया कि, उसे झूठा फंसाया गया है। कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, केवल सह-आरोपी के बयान हैं। वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी कि, मामला गंभीर आर्थिक अपराध का है, आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण और सक्रिय रही है। साक्ष्य से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है, जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं है।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध अलग श्रेणी के होते हैं और समाज व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डालते हैं। ऐसे अपराध योजनाबद्ध तरीके से निजी लाभ के लिए किए जाते हैं, आरोपी की भूमिका गंभीर और साक्ष्यों से समर्थित दिखती है। अपराध की गंभीरता और रकम बहुत बड़ी है, ऐसे में जमानत देना न्याय के हित में नहीं होगा।

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3 Apr 2026, 1:20 PM IST
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