बिलासपुर

CG-TET 2024 के हटाए गए सवाल दोबारा नहीं जुड़ेंगे, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CG-TET 2024 की फाइनल आंसर-की से हटाए गए प्रश्नों को दोबारा शामिल करने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञ समिति के निर्णय में बिना ठोस आधार के न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
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CG-TET 2024
CG-TET 2024 के हटाए गए सवाल दोबारा नहीं जुड़ेंगे(photo-patrika)

CG-TET 2024: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CG-TET 2024 की फाइनल आंसर-की से हटाए गए प्रश्नों को दोबारा शामिल करने की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कहा कि परीक्षा और अकादमिक मूल्यांकन जैसे मामलों में अदालत विशेषज्ञ समिति के फैसले में तभी हस्तक्षेप कर सकती है, जब वह मनमाना या कानून के विपरीत हो। कोर्ट ने माना कि विवादित प्रश्नों को हटाने का निर्णय विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर लिया गया था और फाइनल आंसर-की के आधार पर ही परिणाम तैयार किया जाना पूरी तरह वैध है।

CG TET Final Answer Key: क्या था पूरा मामला?

CG-TET 2024 की फाइनल आंसर-की में सेट-A का प्रश्न 56, सेट-B का प्रश्न 55 तथा सेट-C और D का प्रश्न 57 हटा दिया गया था। इन प्रश्नों के हटने से कई अभ्यर्थी पात्रता अंक से महज एक अंक से पीछे रह गए। करीब 20 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इन प्रश्नों को दोबारा शामिल करने की मांग की थी।

अभ्यर्थियों ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि परीक्षा निर्देशों के अनुसार संबंधित प्रश्नों को रद्द नहीं किया जाना चाहिए था। उनका दावा था कि मॉडल आंसर-की के आधार पर वे क्वालिफाइंग अंक हासिल कर चुके थे, लेकिन फाइनल आंसर-की जारी होने के बाद उनके अंक 74.5 से 74.9 के बीच रह गए। जबकि OBC, SC और ST वर्ग के लिए न्यूनतम पात्रता अंक 75 निर्धारित थे।

व्यापमं ने क्या रखा पक्ष?

CG व्यापमं ने अदालत को बताया कि विवादित प्रश्न एक ही गद्यांश पर आधारित थे। कुछ प्रश्नपत्र सेटों में प्रिंटिंग त्रुटि के कारण गद्यांश और उससे जुड़े प्रश्न सही क्रम में नहीं थे। इससे कुछ अभ्यर्थियों को गद्यांश पढ़ने से पहले ही उससे जुड़े प्रश्न हल करने पड़े। मामले को विषय विशेषज्ञ समिति के पास भेजा गया, जिसने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी सेटों से संबंधित प्रश्न हटाने की सिफारिश की।

सभी अभ्यर्थियों को मिला समान लाभ

व्यापमं ने यह भी स्पष्ट किया कि हटाए गए प्रश्नों के अंक परीक्षा नियमों के अनुसार निर्धारित फार्मूले के तहत सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से दिए गए। इसलिए किसी भी अभ्यर्थी के साथ भेदभाव नहीं किया गया।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद माना कि प्रश्न हटाने का निर्णय विशेषज्ञ समिति की सिफारिश और सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद लिया गया था। अदालत ने कहा कि प्रोविजनल या मॉडल आंसर-की के आधार पर किसी अभ्यर्थी को कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता। अंतिम परिणाम केवल फाइनल आंसर-की के आधार पर ही तैयार किया जाता है, जिसे आपत्तियों और विशेषज्ञों की राय पर विचार करने के बाद जारी किया गया था। इसलिए कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

Updated on:
11 Aug 2026 12:40 pm
Published on:
11 Aug 2026 12:39 pm
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