
Youth Congress Election: युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव को लेकर बिलासपुर जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार चुनाव को लेकर युवा नेताओं के साथ-साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की भी खास दिलचस्पी देखने को मिल रही है। वहीं, अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों के बीच ग्रामीण जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के गुट ने जिलाध्यक्ष पद की दौड़ से खुद को अलग कर लिया है।
सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले भिलाई विधायक देवेंद्र यादव से हुई मुलाकात के बाद गंगोत्री समर्थित पैनल ने चुनाव नहीं लड़ने का मन बना लिया है, क्योंकि उनके पैनल से अब तक इस पद के लिए कोई भी दावेदार सामने नहीं आया है। जानकारी के मुताबिक, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह, जो महेंद्र गंगोत्री के करीबी माने जाते हैं, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे और उनका नाम भी सूची में आ चुका था। इसके बावजूद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। इसके साथ ही गंगोत्री गुट के अन्य संभावित उम्मीदवारों ने भी जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी से दूरी बना ली है।
गंगोत्री गुट के पीछे हटने के बाद अब मुकाबला वर्तमान शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी समर्थित उम्मीदवारों के बीच सिमटता नजर आ रहा है। तीनों गुट अपने-अपने समर्थकों को संगठित करने में जुट गए हैं। सिद्धांशु वर्तमान में शहर अध्यक्ष हैं, इसलिए अपनी टीम मजबूत कर रहे हैं। कोटा विधायक श्रीवास्तव के करीबी शेरू पिछली बार चुनाव जीते थे। वहीं, पूर्व अध्यक्ष केशरवानी की भी छात्र राजनीति में काफी दिलचस्पी है। ऐसे में वे अपने प्रत्याशी इस चुनाव में उतारेंगे, ऐसी संभावना है।
युवा कांग्रेस चुनाव में इस बार आर्थिक पक्ष भी कई संभावित उम्मीदवारों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पार्टी की व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक वोट के लिए 75 रुपए का अंशदान देना होगा। ऐसे में 5 हजार वोट पर करीब 3.75 लाख और 10 हजार वोट पर लगभग 7.50 लाख रुपये का खर्च बैठ रहा है।
यही वजह है कि कई कांग्रेसी युवा नेताओं ने आर्थिक कारणों से चुनाव लड़ने का विचार छोड़ दिया है। वहीं, संगठन ने नामांकन प्रक्रिया के लिए समय बढ़ाते हुए अब अंतिम तिथि 5 जुलाई निर्धारित कर दी है, जिससे चुनावी गतिविधियां और तेज हो गई हैं।