Bilaspur High Court: CGPSC 2021 भर्ती मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित 11 अभ्यर्थियों की जॉइनिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है।
CGPSC Selected Candidates: छत्तीसगढ़ पीएससी 2021 भर्ती मामले में हाई कोर्ट के अहम फैसले के बाद राज्य सरकार ने डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित 11 अभ्यर्थियों की जॉइनिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह फैसला उन उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनके खिलाफ सीबीआई अब तक कोई ठोस सबूत या चालान पेश नहीं कर पाई है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे चयनित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद अदालत ने राज्य सरकार को 60 दिनों के भीतर जॉइनिंग कराने का निर्देश दिया।
राज्य सरकार के फैसले से असंतुष्ट चयनित अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court), बिलासपुर में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस आरोप तय नहीं हुआ है और न ही जांच एजेंसी ने कोई पुख्ता सबूत पेश किया है, ऐसे में उनकी नियुक्ति रोकी जाना अनुचित है।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ सीबीआई ने अब तक चालान पेश नहीं किया है और जिनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, उन्हें 60 दिनों के भीतर नियुक्ति दी जाए। अदालत के इसी निर्देश के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 अभ्यर्थियों के लिए जॉइनिंग आदेश जारी किया।
CGPSC 2021 के तहत डिप्टी कलेक्टर (Deputy Collector) और डीएसपी के कुल 44 पदों पर चयन हुआ था। इनमें से 4 अभ्यर्थियों के खिलाफ सीबीआई ने विशेष अदालत में चालान पेश किया है, जबकि चार अभ्यर्थी फिलहाल जेल में हैं। शेष उम्मीदवारों ने अदालत में याचिका दायर कर न्याय की मांग की थी। हाई कोर्ट के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल है। उनका कहना है कि लंबे इंतजार और कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें आखिरकार न्याय मिला है और अब वे प्रशासनिक (Administrative) जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार हैं।
बता दें कि CGPSC 2021 भर्ती परीक्षा के जरिए डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी समेत 44 पदों पर चयन हुआ था। भर्ती प्रक्रिया पर अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई। जांच के चलते राज्य सरकार ने चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति रोक दी थी। इसके खिलाफ कई अभ्यर्थियों ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद अदालत ने उन उम्मीदवारों को राहत दी जिनके खिलाफ अब तक कोई चालान या ठोस सबूत पेश नहीं हुआ है।