बिलासपुर

बिलासपुर में ‘200 से 300 रुपये कमीशन लेकर बनाता था टिकट’, RPF की कार्रवाई में रेलवे क्लर्क गिरफ्तार

Railway Reservation Fraud: बिलासपुर के करगीरोड रेलवे आरक्षण केंद्र में टिकट दलाली के आरोप में मुख्य वाणिज्य लिपिक गिरफ्तार हुआ। RPF ने 76 हजार रुपये से अधिक के 15 टिकट, मोबाइल और WhatsApp चैट जब्त की।
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Railway Ticket Scam
RPF की दबिश में पकड़ा गया मुख्य क्लर्क (Photo Source- Patrika Create)

Railway Ticket Scam: रेलवे में टिकट दलाली के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान आरपीएफ ने करगीरोड रेलवे आरक्षण केंद्र में कार्रवाई की है। यहां तैनात मुख्य वाणिज्य लिपिक चंद्रप्रकाश विश्वकर्मा को बिना आरक्षण मांग पत्र के टिकट बनाने और अपने पास रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से टिकटों से जुड़ी WhatsApp चैट भी मिली है।

आरपीएफ के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर वीरेंद्र केंवट नाम के व्यक्ति के कहने पर आरक्षित टिकट बनाता था। इसके बदले वह प्रति यात्री 200 से 300 रुपये कमीशन लेता था। आरपीएफ अब इस मामले में टिकट दलाली से जुड़े दूसरे लोगों और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

मुखबिर की सूचना पर आरक्षण केंद्र में दबिश

बुधवार को आरपीएफ को सूचना मिली थी कि करगीरोड रेलवे आरक्षण केंद्र में टिकटों की बुकिंग को लेकर अनियमितता हो रही है। सूचना के आधार पर टीम ने आरक्षण केंद्र में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान मुख्य वाणिज्य लिपिक चंद्रप्रकाश विश्वकर्मा के पास एक आरक्षित काउंटर टिकट मिला। यह टिकट बिना आरक्षण मांग पत्र के बनाया गया था। इसके बाद आरपीएफ ने उसके मोबाइल फोन की जांच की।

जांच के दौरान मोबाइल में WhatsApp पर टिकट बनाने और देने से संबंधित बातचीत मिली। आरपीएफ ने चैट और मोबाइल में मौजूद टिकटों की जानकारी को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित किया। टीम ने WhatsApp चैट की 14 पेज की प्रिंट कॉपी भी तैयार की। मोबाइल फोन और टिकटों से संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं।

76 हजार रुपये के 15 टिकट मिले

आरपीएफ के मुताबिक, आरोपी के कब्जे से पीएनआर 2164155098 का एक काउंटर टिकट मिला। इसकी कीमत 1470 रुपये थी। इसके अलावा मोबाइल में WhatsApp के जरिए 14 और टिकटों की जानकारी मिली। इनमें तीन पुराने टिकटों की कीमत 9280 रुपये और भविष्य की यात्रा के लिए बनाए गए 11 टिकटों की कीमत 65,470 रुपये थी। इस तरह कुल 15 टिकटों की कीमत 76,190 रुपये बताई गई है। आरपीएफ ने इन टिकटों से संबंधित जानकारी भी जांच में शामिल की है।

जैतहरी के एजेंट के लिए बना रहा था टिकट

आरपीएफ की कार्रवाई के समय मुख्य क्लर्क LTT से गोरखपुर जाने वाले एक यात्री का आरक्षित टिकट बना रहा था। जांच में यह जानकारी सामने आई कि टिकट जैतहरी के एक एजेंट के लिए बनाया जा रहा था। दबिश के दौरान इसी टिकट की बुकिंग की जा रही थी। आरपीएफ को मोबाइल चैट और टिकटों की जांच से टिकट दलाली से जुड़े अन्य सुराग भी मिले हैं।

रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज

कार्रवाई के बाद आरपीएफ ने जब्त टिकट, मोबाइल फोन, WhatsApp चैट की प्रिंट कॉपी और अन्य दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। आरोपी को आगे की कार्रवाई के लिए उसलापुर आरपीएफ पोस्ट को सौंप दिया गया। यहां उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की आगे जांच की जा रही है।

टिकट दलाली के नेटवर्क की जांच

आरपीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और टिकटों की बुकिंग के बाद उन्हें किस तरह यात्रियों या एजेंटों तक पहुंचाया जाता था। मोबाइल में मिली WhatsApp चैट और टिकटों की जानकारी के आधार पर एजेंटों और अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में अगर दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

ओपनिंग डेट पर टिकट बुकिंग भी जांच के दायरे में

रेलवे में आरक्षण खुलने के शुरुआती समय में टिकटों की बुकिंग को लेकर यात्रियों की ओर से अक्सर शिकायतें सामने आती हैं। खासकर लोकप्रिय ट्रेनों में बुकिंग शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है और वेटिंग बढ़ जाती है। आरपीएफ टिकट दलाली के मामलों में इस बात की भी जांच करती है कि टिकट सामान्य यात्रियों के लिए बनाए गए थे या एजेंटों के जरिए उनकी बुकिंग कराई जा रही थी। करगीरोड के इस मामले में भी मोबाइल चैट और टिकटों की जानकारी के आधार पर पूरे लेनदेन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

आरपीएफ चला रही टिकट दलाली विरोधी अभियान

रेलवे में अनधिकृत तरीके से टिकटों की खरीद-बिक्री और दलाली पर रोक लगाने के लिए आरपीएफ की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत करगीरोड आरक्षण केंद्र में यह कार्रवाई की गई।अधिकारियों का कहना है कि टिकट दलाली से जुड़े मामलों में केवल टिकट जब्त करना ही नहीं, बल्कि उसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क तक पहुंचना भी जांच का अहम हिस्सा है। करगीरोड मामले में भी इसी दिशा में आगे की जांच जारी है।

Updated on:
01 Oct 2026 04:15 pm
Published on:
01 Oct 2026 03:57 pm