बिलासपुर

RTE Admission 2026: बिलासपुर में आरटीई की 511 सीटें खाली, हिंदी माध्यम से क्यों मोहभंग? देखें अन्य जिलों की स्थिति

RTE Seats: बिलासपुर में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए निर्धारित सीटों में से बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। खास बात यह है कि अभिभावकों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को लेकर ज्यादा रुचि दिखी, जबकि हिंदी माध्यम की सीटों के लिए अपेक्षाकृत कम आवेदन आए।
2 min read
• •
Updated: 2 Sep 2026, 1:42 PM IST
RTE Admission 2026
RTE (photo-patrika)

RTE Admission 2026: शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत बिलासपुर जिले के निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। इसके बावजूद मौजूदा सत्र में जिले में बड़ी संख्या में सीटें रिक्त रह गईं। जिले में आरटीई के तहत 2215 सीटें निर्धारित थीं, इनमें से 1704 सीटों पर ही प्रवेश हो सका, जबकि 511 सीटें रिक्त रह गईं। दो चरणों के बाद तीसरा और अंतिम चरण भी कराया गया, लेकिन इसके बाद भी सभी सीटें नहीं भर सकीं। रायपुर, दुर्ग और मुंगेली में भी बड़ी संख्या में आरटीई सीटें खाली रह गईं।

खास बात यह है कि अभिभावकों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को लेकर ज्यादा रुचि रही, जबकि हिंदी माध्यम की सीटों पर अपेक्षाकृत कम आवेदन आए। आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। इस बार प्रदेशभर में 23,097 सीटों पर प्रवेश होना था, लेकिन अंतिम प्रक्रिया तक करीब 16,541 सीटों पर ही प्रवेश हो सका। अफसरों के अनुसार, एक ही क्षेत्र के कुछ निजी स्कूलों में आवेदन अधिक आने और दूसरे स्कूलों में कम आवेदन होने से भी सीटें रिक्त रह जाती हैं।

मनचाहे स्कूल में जगह नहीं मिली तो फीस देकर पढ़ा रहे

मंगला निवासी विनय तिवारी ने बताया कि आरटीई में आवेदन इसलिए किया था, ताकि बच्चे को अच्छे अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ा सकें। जिस स्कूल में प्रवेश की उम्मीद थी, वहां जगह नहीं मिली। हिंदी माध्यम में पढ़ाई कराने की इच्छा नहीं है। इसलिए अब निजी स्कूल में फीस देकर बच्चे को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ा रहे हैं।

RTE Admission 2026

अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में नहीं मिली सीट

नेहरू नगर निवासी अजय यादव ने कहा कि आरटीई में सीट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मनपसंद अंग्रेजी माध्यम का स्कूल नहीं मिला। हिंदी माध्यम के स्कूल में बच्चे को भेजना नहीं चाहते, क्योंकि आगे की पढ़ाई अंग्रेजी में ही करनी है। मजबूरी में अब निजी स्कूल की फीस भरकर बच्चे को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ा रहे हैं।

हिंदी नहीं, केवल अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में भरे थे फार्म

जूना बिलासपुर निवासी राकेश विश्वकर्मा ने बताया कि आरटीई का लाभ लेना चाहते थे, लेकिन पसंद के स्कूल में प्रवेश नहीं मिल पाया। हिंदी माध्यम में बच्चे की पढ़ाई कराने को लेकर परिवार तैयार नहीं है। इसलिए केवल अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में ही फार्म भरे थे। अब आरटीई की जगह निजी स्कूल की फीस चुका रहे हैं। मनचाहा स्कूल मिले तो आरटीई में प्रवेश लेना बेहतर विकल्प होगा।

Updated on:
2 Sep 2026, 1:42 PM IST
Published on: