
Teacher Leader Arrest: शिक्षा विभाग के बहुचर्चित फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सीपीसी और शिक्षक नेता साधेलाल पटेल को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। कुछ दिन पहले सिटी कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र समेत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। मामले में साधेलाल पटेल की पत्नी को भी आरोपी बनाया गया है। वहीं, गिरफ्तारी के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस पूरे घोटाले में केवल एक शिक्षक ही जिम्मेदार था या फाइलों को आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी।
शिक्षा विभाग ने फरवरी में ही साधेलाल पटेल को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद करीब 10 महीने तक मामला आगे नहीं बढ़ा। इस दौरान लगातार यह सवाल उठता रहा कि आखिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है और क्या आरोपी को किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है। अब एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी के बाद मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है।
जांच के अनुसार, पौंसरा में पदस्थ संकुल समन्वयक साधेलाल पटेल पर अपने पद का दुरुपयोग कर फर्जी मेडिकल बिलों के जरिए सरकारी राशि निकालने का आरोप है। बीईओ की जांच में सामने आया कि मृत सहायक शिक्षक नरेंद्र कुमार चौधरी के नाम पर 33 हजार रुपये के वास्तविक मेडिकल बिल को फर्जी तरीके से बढ़ाकर 5.33 लाख रुपये का भुगतान करा लिया गया। इसके अलावा खुद और अपनी पत्नी के नाम पर भी फर्जी मेडिकल बिल लगाकर करीब 30 लाख रुपये की सरकारी राशि का भुगतान कराने का आरोप है।
शिकायतकर्ता सौरभ मजूमदार और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मिले दस्तावेजों के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने साधेलाल पटेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
शिक्षक नेता की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता केवल एक व्यक्ति के स्तर पर कैसे संभव हुई। विभागीय सूत्रों और शिक्षा जगत में यह चर्चा तेज है कि बिल्हा ब्लॉक के तत्कालीन बीईओ, डीईओ कार्यालय के संबंधित कर्मचारियों और फाइलों को प्रक्रिया में आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बिना प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी हुए इतनी बड़ी राशि का भुगतान होना कई सवाल खड़े करता है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी मेडिकल बिल और दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया। मृत कर्मचारी के नाम का इस्तेमाल कर राशि निकालने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक सीएसपी बिलासपुर गगन कुमार ने बताया कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से फर्जी मेडिकल बिल और दस्तावेजों के जरिए राशि निकालने की शिकायत प्राप्त हुई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है और जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।