
बिलासपुर . केंद्र सरकार ने नि:शक्तों के लिए 21 प्रकार की श्रेणी बनाई है। इन सभी श्रेणियों को राज्य में प्रदेश सरकार लागू करें ताकि राज्य के पचास हजार नि:शक्त बेरोजगारों को फायदा मिल सके। नि:शक्तों की आड़ में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी करने वलों पर कड़ाई से रोक लगाई जाए। राज्य में शासकीय सेवा में अस्थि बाधित नि:शक्तों की तादाद सर्वाधिक है। राज्य में अचानक श्रवण बाधित नि:शक्तों की संख्या तेजी से बढ़ी है,इस मामले की जांच सरकार को करनी चाहिए।
उक्त बातें छत्तीसगढ़ शासकीय नि:शक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष चिंतामणी दीक्षित ने बुधवार को 'पत्रिका टॉपिक ऑफ द डे Ó में कहीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नि:शक्तों को पदोन्नति में तीन प्रतिशत आरक्षण और भर्ती में 6 प्रतिशत आरक्षण मिलने के बाद इसका लाभ मिल रहा है। राज्य में कापुी कर्मचारी अधिकारियों को पदोन्नति हुआ है। इसी प्रकार नि:शक्तों की भर्ती में आरक्षण देने से काफी संख्या में बेरोजगार नि:शक्तों को नौकरी मिलने में सफलता हासिल की है। विशेषकर शिक्षा कर्मी की भर्ती में नि:शक्तों को अधिक मौका मिला है।
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केंद्र की नीति को राज्य लागू करें : दीक्षित ने कहा कि केंद्र सरकार ने नि:शक्तों की 21 प्रकार की श्रेणियां बनाई है। इन सभी श्रेणियों को राज्य सरकार लागू करें। इससे राज्य के नि:शक्तों को फायदा मिल सकेगा। विशेषकर सरकारी विभागों में नौकरी के लिए ऐसे नि:शक्त आवेदन कर सकेंगे।
श्रवण बाधितों की बाढ़ आने की हो जांच : छत्तीसगढ़ शासकीय नि:शक्त अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में एकाएक श्रवण बाधित नि:शक्तों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इस मामले की जांच राज्य सरकार को करनी चाहिए। ताकि वास्तविक में श्रवण बाधित लोगों को सरकारी सेवा में जाने के अवसर से वंचित न हो सके।
अस्थि बाधित सबसे अधिक : राज्य में सबसे अधिक अस्थि बाधित नि:शक्त है। दूसरे नंबर पर श्रवण बाधित नि:शक्तों एवं सबसे कम संख्या दृष्टि बाधित नि:शक्त है। दीक्षित ने कहा कि राज्य में लगभग दस हजार नि:शक्त सरकारी सेवा में कार्यरत है।